छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा स्थित बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के मंदिर में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। कोई घुटने के बल जा रहा है, तो कोई पैदल माता के दरबार पहुंच रहा है, हालांकि कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए प्रशासन ने पदयात्रा पर रोक लगाई है। इस साल शारदीय नवरात्रि में जगदलपुर से लेकर दंतेवाड़ा तक पदयात्रियों की सुविधा के लिए एक भी सुविधा केंद्र या पंडाल नहीं है। ऐसे में माता के भक्तों को पानी व खाने के लिए भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
घुटने के बल माता के दरबार जा रहे जगदलपुर के भक्त पानी के तरसते हुए नजर आए। मंदिर पहुंचने से ठीक 3-4 किमी पहले राहगीरों ने उनकी मदद की, उन्हें पानी की बोतल दी। भक्तों को हो रही परेशानी की खबर दंतेवाड़ा के कलेक्टर दीपक सोनी को लगी तो वे अपनी गाड़ी में पानी की बोतलें लेकर उनके पास पहुंच गए। साथ ही उनके लिए मेडिकल किट की भी व्यवस्था करवाई। पद यात्रियों के लिए एक सुविधा वाहन को भी गीदम से दंतेवाड़ा के बीच घुमाया गया। इस वाहन में भक्तों के लिए पानी और मेडिकल किट की व्यवस्था थी।
बाबा रामदेव समिति ने की खाने की व्यवस्था
पंचमी के दिन एकाएक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती गई। इस दौरान कई भक्त गीदम स्थित बाबा रामदेव समिति के कार्यालय भी पहुंचे। यहां उन्होंने समिति के सदस्यों से पूछा कि इस बार यहां खाने की कोई व्यवस्था नहीं है क्या? हम जगदलपुर से निकले हैं, रास्ते में कुछ भी नहीं खाया। इतने में ही बाबा रामदेव मंदिर समिति के सदस्यों ने आनन-फानन में मंदिर के सामने पंडाल लगाया और तुरंत श्रद्धालुओं के लिए भोजन और चाय की व्यवस्था की। साथ ही जो श्रद्धालु उपवास पर थे उनके लिए फलों की भी व्यवस्था की।
मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि, पिछले कई सालों से शारदीय नवरात्रि के समय नि:स्वार्थ भाव से माता के दरबार आने वाले भक्तों के लिए खाने व चाय की व्यवस्था करते हैं। इस बार कोरोना महामारी की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए प्रशासन ने पंडाल लगाने और खाने की व्यवस्था करने की मनाही की थी। मां दंतेश्वरी के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालु जब बाबा मंदिर पहुंचे, तो उन्होंने खाने के लिए पूछा। उसके बाद पंचमी के दिन ही भक्तों के लिए सारी व्यवस्था की गई है।
घर की परेशानियों को देख माता से मांगी थी मन्नत
जगदलपुर के श्रद्धालु ने बताया कि, घर की परेशानियों को लेकर उन्होंने 8 साल पहले मां दंतेश्वरी से मन्नत मांगी थी। माता रानी ने उनकी सारी मुरादें पूरी कर दी। वह हर साल जगदलपुर से गीदम तक पैदल आते हैं और गीदम के हारम पारा से घुटने के बल मां दंतेश्वरी के दरबार पहुंच दर्शन करते हैं, लेकिन पिछले साल कोरोना की वजह से माता का मंदिर भक्तों के लिए बंद था इसलिए नहीं आ सके। इस साल मंदिर खुलने की जानकारी मिली तो मन्नत के अनुसार माता के दर्शन करने जा रहे।


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