दुर्ग। सावन अमावस्या के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोकपर्व हरेली तिहार का नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा कृषि उपज मंडी परिसर, धमधा रोड में पारंपरिक उल्लास और उत्साह के साथ आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महापौर अलका बाघमार, सभापति श्याम शर्मा और प्रभारी आयुक्त मोहेंद्र साहू की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस दौरान अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और शहर की खुशहाली की कामना करते हुए गोधन तथा खेती-किसानी में उपयोग होने वाले पारंपरिक कृषि औजारों की विधिवत पूजा की गई।
हरेली पर्व की परंपराओं को जीवंत करते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने गेड़ी चलाकर पर्व की खुशियों में हिस्सा लिया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों का आनंद लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नागरिक भी शामिल हुए।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 150 से अधिक पौधों का रोपण
हरेली तिहार के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और शहर में हरियाली बढ़ाने का संदेश देते हुए कृषि मंडी परिसर में 150 से अधिक पौधों का रोपण किया गया। महापौर अलका बाघमार, सभापति श्याम शर्मा, एमआईसी सदस्यों और पार्षदों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पौधे लगाए। इस दौरान नागरिकों से केवल पौधे लगाने ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और संरक्षण करने की भी अपील की गई।
पर्यावरण प्रेमी एवं स्वच्छ सर्वेक्षण ब्रांड एंबेसडर डॉ. विश्वनाथ पाणिग्राही द्वारा तैयार किए गए पोस्टर के माध्यम से भी ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। उपस्थित अतिथियों ने पोस्टर के साथ नागरिकों को अधिक से अधिक पौधरोपण और पौधों के संरक्षण का संकल्प दिलाया।
पारंपरिक खेलों ने बढ़ाया उत्साह
हरेली के पारंपरिक रंग को बनाए रखने के लिए कार्यक्रम में पटरीपार क्षेत्र की महिलाओं ने फुगड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। गेड़ी चलाने की प्रतियोगिता और लोक परंपराओं से जुड़ी गतिविधियों ने कार्यक्रम में उत्साह और आकर्षण बढ़ाया। आयोजन के जरिए नई पीढ़ी को छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोक खेलों से परिचित कराने का प्रयास भी किया गया।
महापौर ने बताया हरेली का महत्व
महापौर अलका बाघमार ने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की खेती-किसानी, संस्कृति और प्रकृति से गहराई से जुड़ा पर्व है। यह पर्व हरियाली, नई फसल की शुरुआत और किसानों की खुशहाली का संदेश लेकर आता है। हरेली पर किसान अच्छी फसल की कामना के साथ गोधन और खेती-किसानी में उपयोग होने वाले औजारों की पूजा करते हैं।
उन्होंने कहा कि हल, कुदाली, फावड़ा और ट्रैक्टर आदि कृषि उपकरणों को साफ कर पूजा करने की परंपरा आज भी छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नीम की पत्तियों का उपयोग, घरों के दरवाजों पर नीम की डालियां लगाना और गेड़ी चढ़ना भी हरेली की खास पहचान है।
नई पीढ़ी तक पहुंचे लोक संस्कृति का संदेश
सभापति श्याम शर्मा ने कहा कि हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस पर्व पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दौड़, कबड्डी, भंवरा, फुगड़ी और गेड़ी जैसे पारंपरिक खेल आयोजित किए जाते हैं।
प्रभारी काशीराम कोसरे ने कहा कि किसानों की मान्यता है कि हरेली के दिन कृषि औजारों और गोधन की पूजा करने से वर्षभर अच्छी फसल और खुशहाली बनी रहती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़कर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी देखभाल करें।
इस आयोजन के माध्यम से नगर निगम दुर्ग ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति, खेती-किसानी की परंपरा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ते हुए शहरवासियों को हरियाली और स्वच्छता का संदेश दिया।

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