रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने 27 से 29 सितम्बर तक असमाविष्‍ट क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाया था
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NSO के रायपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने 27 से 29 सितम्बर तक असमाविष्‍ट क्षेत्र के उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाया था। - Dainik Bhaskar


छत्तीसगढ़ में एक अक्टूबर से अगले साल 30 सितंबर तक छोटे दुकानदारों जैसे राशन, सैलून, चाय और नाश्ते के ठेले वाले, रिक्शा, ऑटो चलाने वाले, कोऑपरेटिव सोसाइटी, आटे और दाल के ट्रेडर्स, ब्रोकर, निजी स्कूल, ट्यूटर, ट्रस्ट, सोसायटी की आय जानी जाएगी। प्रदेश के 228 गांवों और रायपुर समेत 165 शहरों में सर्वे टीमें पहुंचेगी। उनसे धंधे में लगाई रकम और होने वाली आय का अंतर पता किया जाएगा। इससे यह सामने आएगा कि देश की अर्थव्यवस्था में एक साल में छत्तीसगढ़ के लोगों का कितना योगदान है।

केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय घरेलू उपभोग व्यय सर्वे कराएगा। उसने इन छोटे दुकानदारों को असमाविष्ट क्षेत्र के उद्यमों में रखा है, जिनका कंपनी एक्ट में कहीं पंजीयन नहीं है। इनमें कमीशन एजेंट, निजी अस्पताल, टिकट एजेंट भी शामिल हैं। इस सर्वे से माइनिंग, कृषि और सरकारी एजेंसियों को शामिल नहीं किया गया है। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने नक्शे के आधार पर सर्वे वाले स्थानों का चयन किया है। इनमें रायपुर संभाग में 160 जगह हैं। इनमें से 40 पॉकेट राजधानी और उसके आसपास हैं। ये स्थान वो हैं जहां सूची में दिए कारोबार संचालित होते हैं।

देशभर का फाइनल डाटा आने के बाद पता चल सकेगा कि देश के आर्थिक विकास में यह सेक्टर कितना हिस्सेदार हैं। इससे GDP में भी योगदान का पता चलेगा। यह भी पता चलेगा कि कौन से सेक्टरों में ज्यादा काम हुआ है किनमें कम। इस रिपोर्ट से देश में नई नीति बनाने, पिछली नीतियों के असर का मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी। यदि के सर्वे करते वक्त संबंधित क्षेत्र में कोई गैस एजेंसी आएगी, तो उसको भी कवर किया जाएगा। इसमें एजेंसी और उपभोक्ता के बीच होने वाले ट्रांजेक्शन और आय का भी आंकलन होगा। यानी आय को लेकर संचालित सभी संस्थाओं तक टीमें पहुंचेगी, जो संगठित क्षेत्र में नहीं आती हैं।

क्या हासिल करना चाहता है यह सर्वेक्षण

इसको ऐसे समझा जा सकता है। मान लिया कि कोई दुकानदार दाल या आटा बेचने के लिए लाया। उसने इसे कितने में खरीदा, दुकान तक लाने का खर्च, रखने का खर्च सभी को जोड़ने के बाद और बेचने का मूल्य इन दोनों में अंतर के बाद उसने प्रति किलो या पैकेट कितनी कमाई की? यह जाना जाएगा। यह भी जाना जाएगा कि अगर कोई होटल चला रहा है तो उसके परिवार के कितने सदस्य उसे सहयोग करते हैं। उसने इस होटल में सहयोगियों के तौर पर कितने लोगों को रोजगार दिया है। वह उन्हें कितना वेतन देता है।

ऐसे होगा यह पूरा सर्वेक्षण

राष्ट्रीय सांख्यिकी अधिकारी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वे के लिए उप महानिदेशक रोशन लाल साहू ने ट्रेनिंग देकर क्षेत्रवार प्रशिक्षित टीमें तैयार की हैं। ये सभी फील्ड में जाकर लेस-पेपर सर्वे करेंगे। टेबलेट पर ऑनलाइन जानकारी फीड करेंगे। इसे वे सुपरवाइजरों को रोज भेजेंगे। वे इसकी वैलिडिटी चैक करने के बाद इसे प्रोसेसिंग सेंटर नागपुर भेजेंगे। सर्वे के लिए देश को पांच जोन में बांटा गया है। इसमें वेस्टर्न जोन में छत्तीसगढ़ के साथ गुजरात व महाराष्ट्र भी हैं। डाटा प्रोसेसिंग होने के बाद इसकी रिपोर्ट प्रकाशित की जाएगी।

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