कबीरधाम, 18 अक्टूबर 2021.
परिवार नियोजन हेतु पुरुष नसबंदी के मामले में कबीरधाम जिला पूरे छत्तीसगढ़ में रोल मॉडल बन गया है। पिछले तकरीबन 3 वर्षों से लगातार प्रति वर्ष औसतन 350 का आंकड़ा पार करने वाले इस जिले में बीते सत्र में अप्रैल से सितम्बर माह तक कोविड पीक होने के बावजूद 50 पुरुषों ने नसबंदी कराई थी। जबकि वर्तमान सत्र में अप्रैल से सितम्बर तक 88 पुरुषों नसबंदी कराई है जो कि पहले से अधिक अर्थात उत्साहवर्धक है।
परिवार नियोजन के प्रति लोगों में रुचि जगाने में स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों को लगातार सफलता मिल रही है। कबीरधाम जिले के लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है और खुशी की बात यह है कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन पुरुष भी अब नसबंदी को अपना रहे हैं। यही कारण है कि जिले में पुरुष नसबन्दी की स्थिति राज्य के अन्य अनेक जिलों से काफी बेहतर है। बीते दिनों जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा के तहत जिले में लगभग 601 लक्ष्य दम्पत्तियों की बैठकें की गई और उन्हें परिवार नियोजन हेतु नसबंदी कराने के लिए प्रेरित किया गया। वहीं पता लगा कि इनमें से बहुत से लोगों ने नसबंदी करा ली है और जो बचे हुए हैं वह नसबंदी कराने में रुचि ले रहे हैं।इसी तरह जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा पुरुषों को भी नसबंदी के लिए प्रेरित किया जा रहा है और इस सम्बंध में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार भी किया गया है जिसके परिणाम स्वरूप लोगों ने पुरुष नसबंदी के प्रति रुचि और भरोसा दिखाया है। पुरुष नसबंदी को लेकर लोगों में भ्रम भी व्याप्त था जिसे सीएमएचओ डॉ. शैलेन्द्र कुमार मण्डल के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार जनसम्पर्क कर दूर किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार मण्डल द्वारा व्यक्तिगत तौर पर अलग-अलग बैठकों में इस विषय मे रुचि लेने के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को जागरूक किया गया, जिससे आमजनता में आदर्श प्रस्तुत हो सके। इसी कड़ी में विभाग के कुछ पुरुष कर्मचारियों ने भी इस दिशा में रुचि दिखाते हुए स्वयं भी नसबंदी कराई है।
कवर्धा और बोड़ला आगे
अप्रेल से सितम्बर 2021 तक के जिले के आंकड़ों में पुरुष नसबंदी में कबीरधाम और बोड़ला विकासखंड काफी आगे हैं। कबीरधाम व बोड़ला विकासखंड में अब तक क्रमशः 27-27 पुरुषों की नसबंदी की गई है। इसी तरह पंडरिया में 23, सहसपुर लोहारा में 6 और जिला अस्पताल में 5 लोगों ने नसबंदी कराई है। कबीरधाम के बीएमओ डॉ. सतीश चंद्रवंशी ने बताया, “इसके लिए प्रेरकों की मेरिट सूची बनाई गई है। लोगों को लगातार प्रोत्साहित कर पुरुष नसबंदी के लिए जागरुक किया जा रहा है”।
अन्य जिलों की अपेक्षा कबीरधाम में अधिक है प्रोत्साहन की राशि
पुरुष नसबंदी कराने वाले को कबीरधाम में सरकार की ओर से 3,000 रुपये प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है और प्रेरक को 400 की राशि दी जा रही है। ज्ञात हो कि सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में कबीरधाम और सरगुजा जिले को छोड़कर शेष जिलों में प्रोत्साहन राशि 2,000 रुपये है।
सरल है पुरुष नसबंदीः डॉ. मण्डल
सीएमएचओ डॉ. शैलेन्द्र कुमार मण्डल ने पुरुष और महिला नसबंदी की प्रक्रियाओं के बारे में बताया, “पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी से अपेक्षाकृत अधिक सरल है। इसके बावजूद भ्रम, सामाजिक मान्यताओं और पुरुष प्रधान समाज होने के कारण लोग इसे अपनाने से कतराते हैं”। उन्होंने बताया, “बिना चीरा के नसबंदी के बाद व्यक्ति को किसी प्रकार के आराम की विशेष आवश्यकता नहीं होती है। इससे न ही किसी प्रकार की कमजोरी आती है और न ही यह वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है। नसबंदी के बाद कम से कम तीन माह यौन संबंधों से परहेज रखना चाहिए अथवा कंडोम का उपयोग करना चाहिए क्योंकि शुरुआती 3 माह तक प्रजनन की स्थितियां रहती हैं”। डॉ. मण्डल ने युवाओं को इस तरह के सभी विषयों पर जागरुक रहकर समाज को भी जागरुक करने की अपील की है।
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