छत्तीसगढ़, के एक गांव में आज भी सदियों पुरानी सवनाही परंपरा निभाई जा रही है। आधी रात को बैगा (पारंपरिक पुजारी) द्वारा विशेष पूजा-पाठ और तंत्र-मंत्र की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद गांव की सीमा को बांधने की रस्म निभाई गई।
परंपरा के अनुसार, बैगा ने गांव की सीमाओं पर पूजा कर सुरक्षा घेरा बनाया और कई घरों के बाहर गोबर के निशान लगाए गए। इसके बाद ग्रामीणों को 24 घंटे तक गांव से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी गई।
ग्रामीणों का मानना है कि सवनाही परंपरा गांव को संकट, बीमारी और नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए की जाती है। इस दौरान गांव में विशेष नियमों का पालन किया जाता है और लोग अपने घरों में रहकर पूजा-पाठ करते हैं।
हालांकि आधुनिक दौर में भी इस तरह की परंपराएं लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। कुछ लोग इसे आस्था और संस्कृति से जोड़कर देखते हैं, तो वहीं कुछ लोग इसे पुरानी मान्यताओं के रूप में देखते हैं।

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