दुर्ग। शहर में जर्जर और खतरनाक मकानों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। 38 जर्जर मकानों को चिन्हित करने के बाद भी अब तक सिर्फ एक मकान गिराया गया है, जबकि बाकी मकानों को लेकर कार्रवाई कागजों तक सीमित नजर आ रही है।
बारिश और खराब मौसम के बीच जर्जर मकानों से हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है। ऐसे मकानों में रहने वाले लोगों के साथ-साथ आसपास से गुजरने वाले राहगीरों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। इसके बावजूद अधिकांश चिन्हित भवनों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार तो नहीं कर रहा।
प्रशासन की ओर से जर्जर मकानों को चिन्हित कर नोटिस और अन्य औपचारिकताएं पूरी की गई हैं, लेकिन 38 में सिर्फ एक मकान को गिराया जाना कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कमजोर भवन कभी भी भरभराकर गिर सकते हैं और जान-माल का नुकसान हो सकता है।
ऐसे में जरूरत है कि चिन्हित सभी खतरनाक मकानों की स्थिति का तत्काल दोबारा निरीक्षण कर समय रहते सुरक्षित तरीके से कार्रवाई की जाए, ताकि किसी बड़े हादसे के बाद प्रशासन को जागने की नौबत न आए

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