NTPC से खरीदे जा रहे कोयले के इस्तेमाल से महंगा हुआ बिजली उत्पादन, सरकार को 120 करोड़ रुपये प्रति माह लग रही चपत
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13/सितबंर/2022

रायपुर. NTPC की ओर से आयातित कोयले के इस्तेमाल के कारण बिजली की खरीदी लागत में 120 करोड़ प्रति महीने की वृद्धि हुई है. एक आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि ताप विद्युत केन्द्रों को पर्याप्त मात्रा में घरेलू कोयला उपलब्ध नहीं होने के कारण, विद्युत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा अधिकतम 15 प्रतिशत की मात्रा तक आयातित कोयला उपयोग करने की अनुमति दी गई है और यह अपेक्षा की गई है कि कुल आवश्यकता का 9 प्रतिशत कोयला आयात किया जाए. 

बताया गया है कि जून महीने 2022 से एनटीपीसी (NTPC) द्वारा कुछ पावर प्लांटों में 10 से 15 प्रतिशत तक आयातित कोयला का उपयोग किया जा रहा है. आयातित कोयले की दर घरेलू कोयले की दर के मुकाबले 4 से 6 गुना ज्यादा है. इस कारण आयातित कोयले से उत्पादित विद्युत की दर भी 4 से 6 गुणा ज्यादा होती है. एनटीपीसी (NTPC) द्वारा कोरबा में स्थित ताप विद्युत संयंत्रों की अपेक्षा नॉन पिटहेड संयंत्र जैसे मौदा, खरगोन, गडरवारा, सोलापुर इत्यादि में आयातित कोयले के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है.

जनवरी से मार्च तक एनटीपीसी संयंत्रों से खरीदी जा रही बिजली की केवल उर्जा प्रभार की औसत दर 1.97 रुपये प्रति यूनिट थी, जो जून से अगस्त के मध्य औसत 2.78 रुपये प्रति यूनिट हो गई है. इस प्रकार 40 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है. बताया गया है कि दर में वृद्धि के फलस्वरूप एनटीपीसी को हर महीने करीब 120 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है. नतीजन उपभोक्ताओं पर लगभग 30 पैसे प्रति यूनिट की दर से व्हीसीएस चार्जेस अधिरोपित हो रहे हैं.

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