तीन ट्रांसजेंडर ने राष्ट्रीय स्तर पर दी भरतनाट्यम की प्रस्तुति
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लोगों के ताने सहे और अपमान भी झेला फिर भी लगन के साथ बढ़ीं आगे, देश-दुनिया में बनाई पहचान

लोगों ने ताने दिए, छींटाकशी की। लगातार अपमान किया। सामान्य लोगों की तरह रहने नहीं दिए। ऐसी भी स्थिति आई कि माता-पिता ने भी साथ छोड़ दिया। ट्रांसजेंडर बनने के बाद तो स्वीकार भी नहीं किया। शास्त्रीय नृत्य में भरतनाट्यम और मोहिनी अट्टम सीखना चाहा तो कोई शिक्षा देने के लिए तैयार नहीं था। अपनी लगन के साथ गुरु की तलाश करते रहे। हमारी लगन को देखकर डॉ. हर्षा सेबेस्टियन एंटनी ने हमें नृत्य की बारीकियां बताई। उनके सानिध्य में 5 साल से अभ्यास कर रहे हैं। यह कहना है ऑल इंडिया डांस एसोसिएशन के बैनर तले सेक्टर-2 अय्यप्पा मंदिर में कार्यक्रम देने आईं ट्रांसजेंडर आर निद्रादेवी, संजना चंद्रन और विया पवल की।

पहले परफार्मेंस में हुई थी जबरदस्त हुटिंग, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा
जब में 5-7 साल की थी, तभी से क्लासिकल सीखना चाहती थी। शारीरिक खामियां सामने आईं। लोग छींटाकशी करने लगे। यहां तक माता-पिता भी कहीं लेकर जाने से कतरने लगे। ऐसे में हमारे गुरु आगे आए। उन्होंने मुफ्त में हमें नृत्य की शिक्षा दी। ओडिशा में हुई इंटर यूनिवर्सिटी डांस इवेंट में मुझे प्रथम पुरस्कार मिला। आज मैं बीकाम कर रही हूं।
(जैसा कि संजना चंद्रन ने बताया)

माता-पिता ने आज तक स्वीकार नहीं किया, कड़ी मेहनत जारी है
जब मैं छोटी थी सब कुछ ठीक था। धीरे-धीरे बड़े होने के बाद मेरे व्यवहार और बातचीत का अंदाज लड़कियों की तरह रहा, तो मां और पिता दोनों घबरा गए। हमेशा तिरस्कार भरी निगाहों से ही लोग देखते। माता-पिता ने ही मेरा साथ छोड़ दिया। भारत नाट्यम, ओडिसी और मोहिनी अट्टम में झुकाव बढ़ा। गुरु डॉ. हर्षा ने साथ दिया। देश में प्रस्तुति दे रहे हैं।
(जैसा कि एम. निद्रादेवी और विया पवल ने बताया)

गुरुओं और जजों ने दिया स्टैंडिंग ओवेशन
सेक्टर-2 में शाम 7.30 बजे संजना, निद्रा और जिया ने एक साथ मंच पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। पहले गुरु की चरण वंदना की। इसके बाद उन्होंने स्वर, लय और ताल के साथ भरत नाट्यम की मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं के साथ अय्यप्पा स्वामी की कहानी की शानदार प्रस्तुति दी। इसमें तीनों ने नृत्य के अलग-अलग भावों को एक साथ पिरोने की कोशिश की। यही कारण रहा कि क्लासिकल डांस देखने आए दर्शक बंधे से रह गए। उनकी प्रस्तुति के दौरान कोई हिला तक नहीं। सभी स्वर लहरियों और घुंघरुओं के स्वर में खोए रहे। इसके साथ पीछे से चलते शास्त्रीय संगीत ने इसके रंग को दोगुना कर दिया। यही कारण रहा कि करीब एक घंटे की प्रस्तुति के बाद नृत्याति के नृत्य गुरु एम. रतीश बाबू के साथ सभी चारों जजों ने इन कलाकारों का अभिवादन खड़े होकर किया और उनकी प्रस्तुति की सराहना की।

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