सरकार ने वापस मंगा लिए मिड-डे-मिल के 30 लाख, कर्ज में डूबी स्व सहायता समूह की महिलाएं, उधार का भोजन खिला रहे स्कूली बच्चों को
त्वरित खबरे

जिले में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था अब लड़खड़ाने लगी है। राज्य सरकार की ओर से चार माह से मिड-डे-मिल की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इस चक्कर में किचन संभालने वाली स्व सहायता समूह की महिलाएं बाजार के कर्ज से लद गई हैं।

बड़ी मुश्किल से बच्चों को उधार का भोजन करा रहीं हैं। विडंबना यह है कि राज्य सरकार की ओर से फंड जारी करने के सिस्टम को ऑनलाइन करने का हवाला देकर जिला स्तर पर जारी हुई लगभग 30 लाख रुपए की राशि वापस मंगा ली है। इधर स्व सहायता समूह की महिलाएं कर्ज से परेशान हो गई हैं। आर्थिक संकट के चलते बच्चों को पौष्टिक भोजन भी नहीं दे पा रहीं हैं। मेनू का पालन नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते ही आए दिन शिकायत सामने आ रही है कि बच्चों को एक ही तरह की सब्जी रोज परोसी जा रही है तो कहीं पर दाल नहीं दिया जा रहा है। स्थिति यह है कि ज्यादातर समूह की ओर से गैस सिलेंडर का इस्तेमाल बंद कर दिया गया और लकड़ी लेकर चूल्हे में ही भोजन बनाया जा रहा है।

बाजार से खरीदते हैं राशन
शहर से लगे टेडेसरा, इंदावानी, सोमनी, सांकरा, पनेका, बांकल, पार्रीकला, सुंदरा सहित आसपास के स्कूलों में मध्याह्न भोजन का संचालन करने वाले समूह के सदस्यों ने इस संबंध में बताया कि बच्चों को भोजन देना अब मुश्किल का काम हो गया है। चावल तो सरकारी कोटे से मिल जा रहा है पर दाल, नमक, मिर्च, हल्दी, पूरे मसाले, सब्जियां, तेल तो बाजार से ही खरीदना पड़ रहा है।

यह कारण बता रहे
मिडिया ने पड़ताल की तो पता चला कि स्कूल, शिक्षा विभाग की ओर से मध्याह्न भोजन की राशि जारी करने के लिए पूरे सिस्टम को ऑनलाइन किया जा रहा है। सीधे राज्य स्तर से फंड जारी करेंगे। डीईओ एचआर सोम ने बताया कि ऑनलाइन प्रक्रिया के चलते भुगतान अटका है पर शासन स्तर से प्रक्रिया जारी है। जल्द समस्या दूर हो जाएगी। सीधे खाते में राशि जारी होगी।

त्योहार में परेशान हुए
राजनांदगांव ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने समूह की सदस्यों को आश्वासन दिया था कि 4 नवंबर तक राशि जारी कर दी जाएगी पर भरे त्योहार में फंड नहीं दिया गया। इस चक्कर में समूह के सदस्य कर्ज अदा नहीं कर पाए। फंड के अभाव में इनका त्यौहार भी फीका रहा। बताया कि मध्याह्न भोजन बनाने के लिए नियुक्त रसोइयों को भी वेतन जारी नहीं हुआ है। कई बार मांग किए फिर भी समस्या यथावत है।

संचालन भारी पड़ रहा
समूह की सदस्यों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद स्कूल खुलने पर बच्चों की दर्ज संख्या कम थी पर अब संख्या भी बढ़ने लगी है। ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए पर्याप्त भोजन बनाना भारी पड़ रहा है, क्योंकि चार माह से उधार में सामग्री खरीदकर व्यवस्था बनाए हुए हैं पर ज्यादा दिन तक व्यवस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा। किराना दुकान के संचालक उधार की रकम मांग रहे हैं।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations