छुरिया(त्वरित ख़बरें ) क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा समिति एवं ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में महाराष्ट्र के सीमावर्ती ग्राम चिपोटा(ककोड़ी)में क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा प्रतिमा का अनावरण एवं ध्वजारोहण रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं मनमोहक मांदर नृत्य की प्रस्तुति के साथ सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के उदघाटक गोंड़ महासभा मोहला के अध्यक्ष नरेन्द्र नेताम, अध्यक्ष जिला पंचायत गोंदिया के सेवानिवृत्त उप मुख्यकार्यपालन अधिकारी राजकुमार पुराम, ध्वजारोहक ब्लाक गोंड़ समाज ईस्तारी के अध्यक्ष बाबूराव हिड़को एवं क्षेत्रीय कंवर समाज चिपोटा के अध्यक्ष जासलराम सांगसुरवार, प्रमुख अतिथि ब्लाक गोंड़ समाज छुरिया-डोंगरगढ़ के अध्यक्ष दिनेश कोरेटी दिलेर,गढ़चिरौली के जिला परिषद सदस्य अनिल केरामी क्रान्ति ,चिपोटा के सरपंच राजेन्द्र धमगाये, मिसपीरी के उपसरपंच जीवन सलामें एवं ब्लाक गोंड़ समाज ईस्तारी के सचिव मोहन हिचामी रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुजा अर्चना, ध्वजारोहण,क्रांतिसूर्य भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं माल्यार्पण कर प्रतिमा अनावरण के साथ हुआ । पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष राजकुमार पुराम ने कहा कि आदिवासी समाज का विकास शिक्षा से ही संभव है। आदिवासी समाज के प्रत्येक बच्चा को विद्यालय भेजना होगा। भगवान बिरसा मुंडा ने आजीवन जल, जंगल, जमीन एवं आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया। बिरसा मुंडा के संघर्ष का परिणाम है कि जल-जंगल एवं जमीन पर आदिवासी समाज को पहला अधिकार मिला। जल-जंगल-जमीन पर पहला हक आदिवासियों का है। आदिवासी समाज अच्छे शिक्षा के अभाव में पिछड़ा हुआ है। आदिवासी क्षेत्रों में आजादी के पचहत्तर वर्षो के बाद भी अच्छा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आवागमन की सुविधा का अभाव है। हमें अपने मताधिकार का सदुपयोग करना चाहिए। अपने मताधिकार का प्रयोग सच्चे जनप्रतिनिधियों के चुनाव हेतु करना चाहिए।जनजागरण के लिए सामाजिक सभा नियमित रूप से होते रहना चाहिए चाहे कितने भी लोग सभा उपस्थित रहें इसका परवाह नहीं करना चाहिए। लोक संस्कृति को बचाने के लिए लोक कला का प्रदर्शन होते रहना चाहिए।
उदघाटक नरेन्द्र नेताम ने कहा कि हमें भगवान बिरसा मुंडा के पदचिन्हों पर चलना चाहिए।हमारे आदिम संस्कृति को मूल रूप में संरक्षित करने में महिलाओं को विशेष भूमिका निभाना होगा। हमारे समाज के माता बहनों के साथ अन्याय अत्याचार होता है उससे निपटने के माता बहनों को जागरूक होने की जरुरत है।
ध्वजारोहक बाबूराव हिड़को ने कहा कि आदिवासी समाज के हर महिलाओं को दुर्गावती एवं पुरूषों को बिरसा मुंडा की तरह शोषण के खिलाफ जंग लड़ने की आवश्यकता है। हम गोंड़ महासभा मोहला को विस्तार करने में लगे हुए है ताकि हमारे शक्ति बढ़ सके। भले हम जाति के नाम पर अलग-अलग हो लेकिन आदिवासी समाज के नाम पर एकजुट होना चाहिए।
शायराना अंदाज एवं काव्यात्मक शैली में सभा को संबोधित करते हुए कवि दिनेश कोरेटी दिलेर ने कहा कि आघू हमन राजा रेहेन अब कैसे निच्चट गरीब होगेन, अपन देवी- देवता ल भूलाके मौहा झोर के करीब होगेन। हम इस देश के मूल मालिक है इसलिए हमें सम्पन्न होना चाहिए लेकिन हम विकास की दौड़ में सबसे पीछे पंक्ति पर खड़े हैं ये बहुत ही चिंता का विषय है।आदिवासी समाज के विकास के लिए अच्छी सोच की आवश्यकता है। हमें व्यावसायिक एवं विकास परक सोच अपनाने की जरूरत है ।स्थानीय संस्कृति पर बाहरी संस्कृति को हावी नहीं होने देना है। लोककला का प्रस्तुतिकरण सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि पारम्परिक लोक संस्कृति को बचाने के संदेश देने के लिए भी होता है। आदिवासी समाज का विकास उच्च शिक्षा एवं समाज में पूर्ण नशाबंदी से ही संभव है।
अनिल केरामी क्रान्ति ने कहा कि अन्य समाज के लोग जब आपस में मिलते हैं तो अपने ईष्टदेव का जयघोष करते है लेकिन हमारे आदिवासी समाज के लोग जब आपस में मिलते है तो अपने ईष्टदेव का जयघोष करने में हिचकिचाते है इससे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव नहीं होता।हमारे आदिवासियत को समूल नष्ट करने का उच्च स्तरीय षड्यंत्र हमारे समाज के ही कुछ गद्दारों के सहयोग से किया जा रहा है इससे आदिवासी समाज को सावधान रहकर अपनी मूल आदिम संस्कृति को बचाना होगा।
इस अवसर पर जमीनदाता कैलाश तारम का शाल श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया। आदिवासी नृत्य दल सोरीटोला चिपोटा एवं जय लिंगो आदिवासी मांदर नृत्य दल आंको(छुरिया) के कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं मनमोहक मांदर नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में समां बांधे रखा।
कार्यक्रम का संचालन शिक्षक द्वारका सांगसुरवार एवं आभार प्रदर्शन आयोजन समिति के अध्यक्ष संजय तारम ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से दुकालू तारम, जयसिंग सांगसुरवार, श्रावण सोरी, अंजोरी मंडावी, संजय तारम, रजलाल सांगसुरवार, सखाराम तारम, गणेश सांगसुरवार, रमेश तारम, पूनाराम कल्लो, सोहन तारम, कुमार घाटघुमर, सुंदर सोरी, जग्गू कुंभरे, सुरेश पुजेरी, सुरतीया सांगसुरवार, प्रकाश गंगाकचुर, परसराम नरेटी, रामसुख सलामें, जयपाल प्रधान, तोमन आचले,लता उइके, रविता तारम, दीपिका तारम, हठियारिन तारम,उत्तम मरकाम,भगवानी दुग्गा, अशोक सलामें, फूलसिंह तारम, विकास उइके, हेमलाल आचले, मानसिंग आचले,चिपोटा के ग्रामवासी आदि सहित ककोड़ी क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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