गांव मर्रा के लालाराम वर्मा ने सेवानिवृत्त के बाद घर की छत पर सब्जी, फूल और औषधि पौधे उगा रहे हैं। 32 साल तक स्वास्थ्य विभाग में सेवा देने वाले 70 वर्षीय लालाराम वर्मा मर्रा निवासी ने रिटायरमेंट के बाद सुकून भरी जिंदगी जीने का नायब तरीका निकाला। घर की छत पर बागवानी कर दूसरों के प्रेरणास्रोत बन गए हैं।
रिटायर के बाद थकान महसूस करने वालों के लिए प्रेरणास्रोत बनकर स्वस्थ और स्वस्फूर्त जीवन जी रहे हैं। वर्मा गांव के संगीत प्रेमी बच्चों को संगीत सीखा कर मंच दिलाते हैं। गांव के गरीब जरूरतमंद लोगों की समर्पित सेवा करते हैं। लालाराम वर्मा के मार्गदर्शन में गांव के बच्चे योग में जिला, राज्य व राष्ट्र में परचम लहराए है। लालाराम वर्मा ने बताया कि घर की छत पर गमले में भिंडी, जड़ी, मिर्ची, धनिया, लालभाजी, चौलाई भाजी, मूली, रखिया, करमत्ता भाजी आदि सब्जी के साथ गिलोय, सर्पगंधा, अश्वगंधा, मिंट, हड़जोड़, अपराजिता, पारिजात, वासा, अडूसा, पियावांसा जैसे बड़ी बीमारियों पर काम करने वाली औषधि के साथ सेवंती, डहलिया, मोगरा, गोंदा, अम्बर लता आदि फूल के पौधे लगाएं हैं। इधर लालाराम के मार्गदर्शन में गांव के बच्चे योग में परचम लहरा रहे हैं।
नि:शुल्क बाल योग पाठशाला चला रहे
लालाराम वर्मा ने बताया कि योग गुरु बाबा रामदेव से प्रेरणा पाकर गांव के खाली पड़े स्कूल के पुराने भवन में बाल योग पाठशाला हम उम्र तुलाराम वर्मा के साथ मिलकर चलाया। 2008 से लगातार निशुल्क योग शाला चलाकर मार्गदर्शन देते रहे। परिणामस्वरूप योग पाठशाला के छात्र घीरेन्द्र वर्मा ने मत्येन्द्रासन में वर्ल्डवाइड रिकार्ड बनाने में सफलता पाया। मर्रा निवासी लालाराम वर्मा 32 साल तक मर्रा में ही स्वास्थ विभाग में स्वास्थ्य कार्यकर्ता बनकर लोगों की ऐसी सेवा की मर्रा से अन्यत्र स्थानांतरण ही नहीं होने दिया। सर्विस के अंतिम वर्ष में सुपरवाइजर पदोन्नत हुए। सेवानिवृत लालाराम वर्मा ने कहा कि रिटायर होने के पहले ही रिटायर के बाद की योजना बनाकर खालीपन न आने दें।
गरीबों की करते हैं मदद
लालाराम वर्मा दो वर्ष पूर्व अपनी पत्नी की निधन से निवास में अकेला सा हो गए। बच्चे अन्यत्र सेवा में होने के कारण गांव के बच्चों को कुछ सीखाने में व्यस्त रहते है। अपनी पत्नी की सेवाभावी नीति के तहत उनकी बीमा राशि से गरीबों की मदद करते हैं।

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