प्रदेश में साइबर अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इन मामलों की जांच के लिए उपलब्ध संसाधन और पुलिस व्यवस्था उसी गति से मजबूत नहीं हो पा रही है। स्थिति यह है कि पूरे प्रदेश के 33 जिलों के लिए केवल 13 साइबर थाने संचालित हैं, जबकि साइबर अपराधों की जांच का अधिकार भी मुख्य रूप से थाना प्रभारी (टीआई) स्तर के अधिकारियों तक सीमित है। इसके कारण एक-एक अधिकारी पर 100 तक मामलों की जांच का बोझ आ गया है।
साइबर ठगी, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, सोशल मीडिया हैकिंग, डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई धोखाधड़ी और ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। रोजाना बड़ी संख्या में नए प्रकरण सामने आने से जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधों की जांच पारंपरिक अपराधों की तुलना में अधिक तकनीकी होती है। इसमें डिजिटल साक्ष्य जुटाने, बैंकिंग ट्रेल खंगालने, मोबाइल और कंप्यूटर डेटा का विश्लेषण करने तथा विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के साथ समन्वय की आवश्यकता होती है। ऐसे में सीमित स्टाफ और कम संख्या में साइबर थाने होने से जांच की गति प्रभावित हो रही है।
जानकारी के अनुसार, कई साइबर थाना प्रभारियों के पास एक समय में 80 से 100 तक प्रकरण लंबित रहते हैं। इससे नए मामलों की जांच शुरू करने और पुराने मामलों का समय पर निपटारा करने में कठिनाई आती है। कई मामलों में तकनीकी रिपोर्ट और अन्य राज्यों से जानकारी मिलने में देरी भी जांच को प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाना है तो प्रत्येक जिले में पूर्ण संसाधनों से लैस साइबर थाना स्थापित करने, प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की नियुक्ति करने और आधुनिक डिजिटल फॉरेंसिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। साथ ही थाना स्तर के पुलिसकर्मियों को भी साइबर अपराधों की प्रारंभिक जांच और डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण का विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
पुलिस विभाग लगातार लोगों को साइबर ठगी से बचने के लिए जागरूक भी कर रहा है। आम नागरिकों से अपील की जा रही है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें और किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस बल, तकनीकी संसाधनों और जांच तंत्र का विस्तार समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।

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