पाटन चुनाव याचिका: हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की अर्जी खारिज की, 5 अक्टूबर को विजय बघेल देंगे गवाही
त्वरित खबरें :अरुण रिपोर्टिंग

बिलासपुर। पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से दायर आवेदन को खारिज कर दिया है। भूपेश बघेल की ओर से मांग की गई थी कि भाजपा सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त किया जाए। कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब इस मामले में आगे साक्ष्य और गवाही की प्रक्रिया जारी रहेगी।

45 दिन की समय-सीमा का दिया था तर्क

भूपेश बघेल की ओर से दायर आवेदन में चुनाव याचिका की वैधता पर आपत्ति उठाई गई थी। उनका तर्क था कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका निर्धारित 45 दिन की समय-सीमा के भीतर दाखिल होना जरूरी है और विजय बघेल की याचिका समय-सीमा के संबंध में आपत्ति के दायरे में आती है। इस आधार पर याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी।

मामले में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद हाईकोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को भूपेश बघेल की ओर से दायर आवेदन को खारिज कर दिया। इससे विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

5 अक्टूबर को विजय बघेल की गवाही

इस मामले में 10 सितंबर को विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे अपने साक्ष्य दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट पहुंचे थे। हालांकि, इसी दौरान भूपेश बघेल की ओर से आवेदन पेश किए जाने के कारण साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब आवेदन खारिज होने के बाद 5 अक्टूबर से गवाही की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई है।

5 अक्टूबर को विजय बघेल के साक्ष्य दर्ज किए जाने के बाद मामले में आगे जिरह और अन्य साक्ष्यों की प्रक्रिया होगी। फिलहाल हाईकोर्ट का यह आदेश चुनाव याचिका के अंतिम फैसले का आदेश नहीं है। चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय आगे होने वाली सुनवाई, साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर होगा।

क्या है मामला?

2023 के पाटन विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल निर्वाचित हुए थे। भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल ने उनके निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की है। याचिका में चुनाव प्रक्रिया और कथित आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

अब हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई साक्ष्य और गवाही के चरण में आगे बढ़ेगी। 5 अक्टूबर की कार्यवाही को इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

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