दुर्ग। जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में सामने आए फाइनेंस धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अन्य लोगों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मोबाइल, एसी समेत इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराते थे और बाद में सामान को संबंधित व्यक्ति को देने के बजाय सेकंड हैंड बाजार में बेच देते थे।
इस मामले में पुलिस पहले ही ऋषभ शर्मा, दीपेश जोशी और दुर्गेश गुप्ता को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने अब मिहिर रंजन रॉय (25), निवासी चौहान टाउनशिप, स्मृतिनगर, भिलाई और शेखर देशमुख (27), निवासी केलाबाड़ी, दुर्ग को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
ऐसे करते थे फाइनेंस फ्रॉड
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों द्वारा अन्य व्यक्तियों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर विभिन्न फाइनेंस कंपनियों से मोबाइल, एसी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराया जाता था। फाइनेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामान संबंधित व्यक्ति को नहीं दिया जाता था। इसके बाद सामान को सेकंड हैंड बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाने का आरोप है।
इस पूरे मामले में खास बात यह है कि सामान संबंधित व्यक्ति को नहीं मिलने के बावजूद फाइनेंस की किस्त चुकाने की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति के नाम पर बनी रहती थी। इससे पीड़ितों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। इससे पहले इसी तरह के मामले में एक युवक के नाम पर एसी फाइनेंस कराने की शिकायत पर पद्मनाभपुर पुलिस ने ऋषभ शर्मा समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
दो और आरोपियों तक कैसे पहुंची पुलिस
पुलिस ने पहले गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और विवेचना के दौरान मिले तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी आधार पर मामले में मिहिर रंजन रॉय और शेखर देशमुख की संलिप्तता सामने आने के बाद पुलिस टीम ने उनकी पतासाजी कर दोनों को गिरफ्तार किया। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक सैमसंग मोबाइल फोन, बैंक खातों से संबंधित पासबुक और प्रकरण से जुड़े अन्य दस्तावेज एवं साक्ष्य भी जांच में शामिल किए हैं।
जांच के दौरान सामने आया है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था। सितंबर की शुरुआत में सामने आई रिपोर्टों में इस फाइनेंस फ्रॉड में पीड़ितों की संख्या करीब 200 तक पहुंचने की बात कही गई थी।
पद्मनाभपुर पुलिस मामले में फाइनेंस प्रक्रिया, दस्तावेजों के इस्तेमाल, इलेक्ट्रॉनिक सामान की बिक्री और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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