जिस सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह को ड्रग विभाग ने थमाया नोटिस, उन्हीं पर ही कार्रवाई की जिम्मेदारी
त्वरित खबरे

जिला अस्पताल के जन औषधि केंद्र से ब्रांडेड दवाएं बेचने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर को भी आरोपी मानते हुए नोटिस जारी किया गया है। नोटिस खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जारी किया गया है। खास बात यह है कि सीएमएचओ नोटिस जारी किए जाने वाले ड्रग विभाग के पदेन उपसंचालक होते हैं।

सीएमएचओ के अलावा दवा दुकान के संचालक मनीष खत्री को भी नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा संचालित किया गया है। सोसाइटी के सचिव सीएमएचओ होते हैं। 25 अक्टूबर को यह नोटिस जारी किया गया है। दवा विक्रेता को 1 दिन में जवाब नहीं दिए जाने या संतोषजनक जवान नहीं होने पर ड्रग लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अनुज्ञापन अधिकारी बेनीराम साहू ने जारी नोटिस की पुष्टि की है। बतौर सचिव रेड क्रास सोसाइटी सीएमएचओ के जवाब देने की समय-सीमा भी खत्म हो गई है। क्योंकि ड्रग विभाग ने दोनों पक्षकारों को जवाब देने के लिए एक दिन का समय दिया था। तीन दिन बीत गए हैं। सीएमएचओ ने जवाब नहीं दिया।

नियम-कायदों को ताक पर रखकर हो रहा था दवा दुकान का संचालन
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी खामी यह मिली कि अधिकारियों के निरीक्षण के वक्त जन औषधि केंद्र में न लाइसेंसी फार्मासिस्ट शेफाली मौजूद थी, न ही संचालक मनीष खत्री मौजूद थे। संचालक की जगह, उसके पिता ज्ञानचंद रू चंदानी थे। यहां लंबे समय से बगैर लाइसेंसी फार्मासिस्ट दवा की बिक्री की जा रही थी।

फार्मासिस्ट स्टोर के बजाए घर पर थी, सीएमएचओ को थी इसकी जानकारी
निरीक्षण के समय संयुक्त कलेक्टर प्रियंका वर्मा और ड्रग विभाग की टीम ने जिस फार्मासिस्ट शैफाली तिवारी को ढूंढ रही थी, वह भिलाई स्थित अपने घर पर थीं। रेडक्रास सोसाइटी के सचिव होने के नाते सीएमएचओ डॉ. गंभीर सिंह को इसकी जानकारी भी थी। जांच में यह बातें सामने आई है।

सीएमएचओ को जिम्मेदार मानते हुए इसलिए मांगा गया स्पष्टीकरण, जानिए
25 अक्टूबर को नोटिस जारी हुआ। जन औषधि केंद्र संचालक मनीष खत्री ने बताया कि वह सीएमएचओ को सूचना देने के बाद ब्रांडेड दवाएं बेच रहा था। हालांकि इसके लिए उसे सीएमएचओ ने उसे लिखित आदेश नहीं दिया था। उनसे कोई जवाब नहीं मिला, इसलिए वह मूक स्वीकृति मान लिया गया था।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश होगी कार्रवाई
रेडक्रास सोसाइटी के सचिव होने के नाते सीएमएचओ इस मामले में दूसरे नंबर के आरोपी हैं। जिस ड्रग विभाग को कार्रवाई करनी उसके पदेन उप संचालक भी हैं। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दोषी पर कार्रवाई की भी बात कही है।

जानिए, सरकारी दवा दुकान में तय नियमों को लेकर हुए उल्लंघन के बारे में

  • {लाइसेंसी फार्मासिस्ट मौजूद नहीं- लाइसेंस के नियम 65(2) का उल्लंघन
  • {ब्रांडेड दवाओं की नियम विरुद्ध बिक्री- औषधि केंद्र की शर्तों का उल्लंघन
  • {बिक्री की गई दवाओं को रिकार्ड नहीं - नियम 65 (4)(3) का उल्लंघन
  • {दवाओं के खरीदी का कोई रिकार्ड नहीं- नियम 65 (4)(4) का उल्लंघन
  • {कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट का साइन बोर्ड नहीं- नियम 65(15) बी का उल्लंघन
  • नोट: उपरोक्त के अलावा 65 (15)(बी), 65 (6), बीपीआई के सेक्शन 2.4 का भी उल्लंघन किया गया।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations