हर साल धान खरीदी के दौरान छह बड़ी गड़बड़ियां लेकिन सुधार पर ध्यान नहीं, केंद्रों में सड़ रहा धान
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प्रदेश सरकार 1 दिसंबर से किसानों का धान खरीदने की तैयारी में है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में सामने आने वाली लापरवाहियों को उजागर करने रणनीति बनने लगी है। की पड़ताल में खुलासा है कि हर साल 6 बड़ी गड़बड़ियां और लापरवाहियां लगातार बरती जा रही है, जिससे सरकार और किसानों को खासा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

समस्या हर साल बनती हैं लेकिन नहीं हो पाता। अगले साल पुन: तैयारियां शुरू होने के साथ पूर्व की लापरवाहियों को भूला दिया जाता है।  पड़ताल में बारदाना संकट, परिवहन की दिक्कतें, सूखत, मिलिंग, बोनस और हर साल खरीदी के बाद धान को संग्रहण व उपार्जन केंद्रों में सड़ाया जाना समस्या बनी हुई है।

पड़ताल में सामने आई गड़बड़ियां, बड़े पैमाने पर लापरवाही

बारदाना संकट: दुर्ग सहित प्रदेशभर में बारदाना संकट पहले से निर्मित हो गया है। दुर्ग में पिछले साल वर्ष 2020-21 में बारदाने की कमी की वजह से 35 हजार किसानों के बारदाने से धान खरीदी की गई। इस साल 5 लाख बारदानों की जरूरत है। वर्तमान में 2 लाख बारदाने ही उपलब्ध हैं। मिलर्स से बारदाने मांगे गए हैं।

परिवहन की दिक्कतें: दुर्ग जिले में पिछले साल 36.22 लाख क्विंटल धान खरीदी की गई। इस साल 42 लाख क्विंटल धान खरीदी होनी है। जिले में 125 राइस मिलरों से धान उठाव के लिए पंजीयन शुरू किया गया है। खरीदी के 72 घंटे के भीतर उपार्जन केंद्रों से धान उठाव होना चाहिए लेकिन धान पड़ा रहता है।

हर साल सूखत की स्थिति, शिकायत भी हुई
जिले के 90 धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी सहकारी समितियों के माध्यम से खरीदी होती है। पिछले साल 29 हजार क्विंटल धान का शार्टेज हुआ। किसानों का इतना धान समितियों में रख रखाव के बाद भी सूख गया। इसे लेकर खरीदी केंद्रों की लापरवाही भी सामने आई। प्रबंधक पर एफआईआर दर्ज कराने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

हर साल सड़ता है संग्रहण केंद्रों में डंप धान
जिले में हर साल संग्रहण केंद्रों में डंप धान सड़ता है। उनका न ही उचित ररखरखाव हो रहा, न ही मिलिंग के इंतजाम किए जा रहे। 2500 रुपए में खरीदे गए इस धान को बाद में नीलामी कर बेच दिया जाता है। पिछले वर्ष 24 केंद्रों में नीलामी के लिए 65075 क्विंटल धान का स्टॉक रखा गया था। इनमें से 15100 क्विंटल नीलामी हो पाई। वह भी 1300 क्विंटल के हिसाब से बेचा गया।

टार्गेट के हिसाब से उठाव नहीं, मिलिंग में देरी
धान की मिलिंग करने के बाद अरवा चावल नान और उसना व फोर्टिफाइड चावल के लिए एफसीआई में जमा होता है। वर्तमान में 15 हजार मिट्रिक टन चावल अरवा नान और 9 हजार मिट्रिक टन चावल उसना व फोर्टिफाइड एफसीआई में जमा नहीं हो पाया है। किसानों का बोनस वितरण: धान खरीदी में बोनस काे लेकर जमकर राजनीति होती रही है।

संग्रहण केंद्रों में है डंप 35 हजार मीट्रिक टन धान
छत्तीसगढ़ में धान को किसानों का सोना कहा जाता है। यह सोना लापरवाही की भेंट चढ़कर काला हो गया है। यह लापरवाही दुर्ग जिले के सेलूद और कोड़िया संग्रहण केंद्रों में देखा जा सकता है। यहां पिछले साल खरीदी धान अब तक संग्रहण केंद्रों में डंप है। 35 हजार मीट्रिक टन धान सेलूद और कोड़िया संग्रहण केंद्र में डंप है। जिसमें दुर्ग जिले का 5 हजार मिट्रिक टन और बेमेतरा जिले का 30 हजार मिट्रिक टन धान हैं। यहां हर फंड में 8 से 10 बोरे धान खराब हो चुके हैं। जिससे चावल बनने की संभावना ही नहीं रह गई है। महासमुंद जिले में 6 हजार मीट्रिक टन धान और रायपुर 28 हजार मीट्रिक टन धान भेजना तय किया है।

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