रायपुर 9 मई 2022
छत्तीसगढ़ के प्रेम आर्य देश इकलौते ऐसे शख्स हैं जिन्होंने गोबर बेचकर 18 लाख रुपए से ज्यादा की कमाई की है। छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना चला रही है। इसके तहत गो पालकों से गोबर की खरीदी की जाती है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक योजना के शुरू होने की तारीख 20 जुलाई 2020 से लेकर अब तक प्रेम आर्या ने 18 लाख 15 हजार 380 रुपए से ज्यादा का गोबर बेचा है। पूरे देश में इस वक्त छत्तीसगढ़ ही इकलौता राज्य है जहां सरकार दो रुपए किलो की दर से गोबर खरीदती है।
मुंगेली के शंकर मंदिर निवासी गो-पालक प्रेम आर्या ने बताया कि उन्होंने साल 2016 में 8 गायों के साथ डेयरी शुरू की थी। प्रेम आर्या पेशे से जनरल स्टोर के मालिक हैं। गायों के प्रति लगाव की वजह से एक छोटी डेयरी शुरू की। कुछ समय बाद उन्होंने और 7 गाय खरीदी। एक वक्त के बाद उन्हें लगा कि अब डेयरी व्यवसाय बंद करना पड़ेगा। प्रेम बताते हैं कि जब छत्तीसगढ़ में गोबर की खरीदी शुरू हुई तो ये योजना उन्हें वाकई अच्छी लगी। प्रेम ने बताया कि जब हम 15 गायों के साथ डेयरी चला रहे थे, लेकिन घाटे में थे। गोबर की खरीदी होने से हमें राहत मिली है। आज हमारी डेयरी में 110 गाय हैं। हम गोबर को सुरक्षित रखते हैं, इसके बाद लगभग हर रोज करीब एक ट्रैक्टर ट्रॉली भरकर गोबर विक्रय के लिए भेजते हैं।

कभी बंद न हो ये योजना
प्रेम आर्य ने बताया कि गोबर खरीदी की वजह से डेयरी व्यवसाय को बूस्टर डोज मिला है। हम ये चाहते हैं कि ये योजना कभी बंद न हो। मैं और मेरा परिवार गायों की सेवा में लगा रहता है। बहुत मेहनत का काम है। साल 2024 में हम 500 गायों के साथ इस कार्य को और आगे ले जाना चाहते हैं। मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि गो माता की सेवा कर पा रहे हैं। गोबर की खरीदी होने की वजह से सब मिलाकर हम हर महीने 35 से 40 हजार रुपए बचा पाते हैं।

ऐसे होता है 110 गायों का मेंटनेंस
प्रेम बताते है कि इन गायों का गोबर साफ करने डेयरी को मेंटेन रखने के लिए हमारे पास 14 कर्मचारियों की टीम है। हर दिन सवा चार क्विंटल चारा लगता है, 10 बोरी दाना रायपुर से मंगवाते हैं, एक डॉक्टर भी तय हैं, मवेशियों के लिए हर महीने 20 से 25 हजार की दवाएं भी आती हैं। 16 के आसपास कूलर डेयरी में लगा रखे हैं, ताकि गायों को गर्मी न लगे।
गोबर वाकई रोजगार का विकल्प है
प्रेम बताते हैं कि गोबर की खरीदी होने की वजह से डेयरी का काम एक अच्छा रोजगार बन सकता है। बशर्ते मवेशियों की सेवा करने का भाव यदि हो। हमारे लिए गाय देवी समान है। मैंने बाद में 32 गाय लेने के लिए बैंक से लोन लिया। मैं हर महीने इसकी 56 हजार रुपए कि किस्त अदा कर रहा हूं। कोई भी बेरोजगार युवा बैंक से लोन लेकर इस काम को कर सकता है। सेवा भाव से इस काम की हमने शुरुआत की थी। अब मेरा सपना है कि हम 500 गायों के साथ गो सेवा के इस काम को आगे ले जाएं।
ये है गोधन न्याय योजना
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आवरा मवेशी जिनसे दूध न मिलने पर पशुपालक उन्हें छोड़ दिया करते थे उनकी समस्या से निपटने इसकी शुरुआत की। गांवों में गोठान (गायों काे रखने की चारागाह नुमा जगह) बनाए गए। गोधन न्याय मिशन के प्रबंध संचालक डॉ. एस. भारतीदासन के मुताबिक छत्तीसगढ़ में अब तक 10,591 गौठान से स्वीकृत किए गए हैं। जिसमें से 8,048 गोठान संचालित हैं। गोबर बेचने वाले 2.87 लाख ग्रामीण पशुपालक पंजीकृत हैं, इसमें से 2.04 लाख गोबर बेच रहे हैं। गोठानों में लगभग 62.60 लाख क्विंटल से अधिक गोबर के एवज में 138.56 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। इस गोबर से खाद और कुछ डेकोरेटिव्स बनाए जाते हैं। खाद किसानों को दी जाती है और सजावटी सामान की भी डिमांड है।
गोबर से बिजली और पेंट बनाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ में गौठानों के गोबर से बिजली बनाने का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। विद्युत उत्पादन प्रोजेक्ट लगाने के लिए अब तक 5 उद्यमियों ने एमओयू किया है। इंडस्ट्रीज छत्तीसगढ़ के गौठानों में इसके लिए 10-10 करोड़ रूपए का निवेश करेंगी। कुछ गौठानों में गोबर से पेंट बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। जिससे घरों की लिपाई पुताई हो सके। हाल ही में गोधन न्याय योजना को राष्ट्रीय स्तर पर एलेट्स एनोवेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

Facebook Conversations