रिसाली मेयर के लिए गृहमंत्री की बहू का नाम:ताम्रध्वज साहू ने कहा- नाम का फैसला करेगी पार्टी, पहले से घोषणा की तो हराने में लग जाएंगे लोग
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नवगठित नगर पालिक निगम रिसाली का पहला महापौर अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला होगी। ऐसे में इस पद के लिए गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के बेटे जितेंद्र साहू की पत्नी सरिता साहू के नाम की चर्चा जोरों से चल रही है। हालांकि जब इस बारे में गृहमंत्री से बात की गई तो उन्होंने कहा कि महापौर का उम्मीदवार कौन होगा इसका फैसला कांग्रेस कमेटी और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे। अभी से वह इस बारे कुछ नहीं कह सकते। महापौर बनाने की प्रक्रिया पार्षद चुनाव के बाद होगी। पहले से नाम की चर्चा कर देने से दूसरे लोग उसे हराने में लग जाते हैं। गृहमंत्री के इस गोल मोल जवाब से भी साफ पता चल रहा है कि वह अपनी बहू को मेयर बनाने की तैयारी में लग गए हैं।

नगर पालिक निगम रिसाली का यह पहला निकाय चुनाव है। अन्य पिछड़ा ओबीसी महिला मेयर का अरक्षण होने के बाद यहां सियासी हलचल तेज हो गई है। रिसाली क्षेत्र गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का गृह क्षेत्र है। इतना ही नहीं भिलाई से विभाजित होकर रिसाली के स्वतंत्र नगर निगम बनने में गृहमंत्री सबसे महत्वपूर्ण भूमिका में है। यह उनके निर्वाचन क्षेत्र दुर्ग ग्रामीण का हिस्सा भी है। इतना ही नहीं पूरे निगम चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर महापौर का नाम फाइनल करने में गृहमंत्री की मर्जी सबसे अधिक चलेगी। इसलिए कांग्रेस से उनकी बहू की दावेदारी मेयर पद के लिए सबसे अधिक मानी जा रही है। उनका पार्षद चुनाव लड़ना तय है। कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि वे अपने पार्षदों का बहुमत निगम में लाएं और फिर अपना मेयर बनाएं। स्थानीय नेताओं के मुताबिक प्रदेश में कांग्रेस का शासन है इसलिए निगम में उनके पार्षद ज्यादा संख्या में जीतेंगे ही यह तय है, लिहाजा मेयर की भी चर्चा हो रही है।

भाजपा तलाश रही सिर्फ बहुमत का रास्ता

दूसरी तरफ भाजपा से दावेदार की बात करें तो इसे लेकर कोई भी बड़ा नेता कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं है। सभी का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता अधिक से अधिक पार्षद उम्मीदवारों को जिताना है। जब पार्षद दल में उनकी पार्टी का बहुमत होगा तो पार्टी जिसका नाम तय करेगी वही मेयर का दावेदार बनेगा।

क्षेत्र में भी सरिता की सक्रीयता सबसे अधिक

गृहमंत्री की बहू सरिता साहू राजनीति के क्षेत्र में काफी मंझी हुई महिला हैं। इससे पहले भी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उनकी काफी सक्रिय भूमिका रही है। अपने ससुर ताम्रध्वज साहू के चुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं की प्रचार-प्रसार टोली को उन्होंने बखूबी संभाला था। इतना ही नहीं चुनाव में डोर टू डोर वोट मांगने में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। सामाजिक संगठनों की बात करें तो उसमें भी उनकी भूमिका काफी अहम रहती है।

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