राजिम कुंभ कल्प में सेल्फी पाइंट बना आकर्षण का केन्द्र
त्वरित ख़बरें - कीर्ति देशमुख

राजिम कुंभ कल्प पहुंच रहे देशभर के साधु-संत

गरियाबंद 5 मार्च 2024  - राजिम कुंभ कल्प में कुलेश्वर महादेव मंदिर के पास संत समागम के सामने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेजती तथा पुनर्जीवित कर उसके संरक्षण के लिए संकल्पित सेल्फी जोन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जिसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग वर्ग के लोग भरपूर मनोरंजन करते नजर आ रहे है। साथ ही मेले में बिताए अपने हर पर को यादगार बनाने के लिए वहां के हर एक सामग्री के साथ सेल्फी लेकर उसे अपने कैमरे में कैद कर रहें है। सेल्फी जोन ग्रामीण जीवन शैली पर आधारित बनाया है जहां बैलगाड़ी की तरफ सबसे ज्यादा भीड़ है। लोग किसान का वेश पहनकर सेल्फी ले रहे हैं। आज हम देख रहें है कि पाश्चात्य सभ्यता तेजी से हम सभी पर हावी हो रही है छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा और सादगी भरी जिंदगी लुप्त होती जा रही है। इस सेल्फी जोन में सभी पुराने गहने और वेशभूषा संग्रहित है। वहां जाने से एक अलग प्रकार की शांति का अनुभव हो रहा है। गिनिज बुक आफ वर्ड रिकार्ड एवं तीन बार सीएम अवार्ड से सम्मानित रानी निषाद ने बताया कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी संस्कृति की पहचान कराने के लिए यह सेल्फी जोन बनाया गया है। स्टाल में पर्रा, टोकरी, पारंपरिक गहने बिछिया, करधन, सुता ऐठी, सुर्रा, किला साडी, खुमरी, राउत वेशभूषा आदि छत्तीसगढ़ी आभूषण लोगो के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है।

                                राजिम  में आयोजित कुंभ कल्प में संत समागम के दौरान राम चरित मानस की चौपाई ‘‘संत समागम तीरथ राजू’’ की प्रासंगिकता को उपस्थित जनसमूह ने साक्षात्कार किया। जब त्रिवेणी संगम के तट पर बने विशाल मंच पर देशभर के संतों का आगमन हुआ। यूं भी संत और तीरथ एक दूसरे के पर्याय हैं। संत के बिना किसी तीरथ का और तीरथ के बिना किसी संत का महत्व नहीं रह जाता। राजिम अपने आप में एक तीर्थ के सामान स्थापित है। जिसकी धरा से निकलने वाली श्रद्धा और आस्था के लिए यहां आने वाले हर श्रद्धालुओं को साकारात्मक गतिज और ऊर्जा से भर देती है। साथ ही त्रिवेणी संगम की स्वर लहरियों के साथ जब भगवान श्री राजीव लोचन की आरती में बजने वाली घंटे-घड़ियाल की आवाज के साथ ताल में ताल मिलकर मग्न होकर नाचती है, उस अलौकिक भावना के भाव का साक्षातकार बहुत ही कम लोगों को ही मिल पाता है, जिसकी जितनी श्रद्धा भाव होते हैं, उसे उसी भाव से उस अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है।

संगम तट पर बने मंच पर कुंभ कल्प में आयोजित संत समागम में भाग लेने आए देशभर के साधु-संत महात्माओं के स्वस्ति वाचन से पूरा कुंभ धर्म और आस्था की त्रिवेणी में डूबकी लगाने से नहीं रोक सके। संतों ने राजिम कुंभ में पहुंचकर भगवान श्रीराजीव लोचन एवं राजिम के पवित्र भूमि के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए आभार माना कि उन्हें छत्तीसगढ़ की इस पवित्र भूमि में भगवान श्री राजीव लोचन के दर्शन लाभ का सौभाग्य मिला। साथ ही राजिम की भूमि अपने संत पुत्रों को अपने सानिध्य में पाकर स्वयं को आनंदित होने से नहीं रोक पाई। उस क्षण में वेद मंत्रों से निकलने वाली आनंदित तरंगों का अहसास उपस्थित संपूर्ण जन समुदाय ने महसूस किया। तभी जन समुदाय ने उद्घोष करते हुए अपने आनंद के साक्षात्कार का जय-जयकार किया। इस क्षण के साक्षी उपस्थित विशाल जनसमूह।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations