6 जूलाई 2022
सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने और बेहतर शिक्षा का दावा करते हुए हर साल करोड़ों रुपए सरकारी स्कूलों में खर्च करने का दिलासा देती है, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत इन तमाम दावों की पोल खोल देती है. जिस स्कूल की हम बात करने जा रहे हैं, वहां नौनिहालों के लिए बैठने तक के लिए ढंग की जगह नहीं है. शिक्षक की कमी के बीच और नए शिक्षक की सालों बाट जोहते इस स्कूल पर सरकार की नज़र अब तक नहीं पड़ी है.
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के आरंग विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम भैंसमुड़ी की प्राथमिक शाला तथा मिडिल स्कूल हालत काफी खराब है. इस स्कूल में पहली से लेकर आठवीं तक की कक्षाएं लगती है, जिसमें मीडिल स्कूल में केवल दो शिक्षक के भरोसे 114 बच्चें अध्ययनरत हैं. वह भी स्कूल भवन जर्जर होने की वजह से एक कक्षा में सभी बच्चों की क्लास लगती है, जो कि शिक्षकों के लिए परेशानी बनी हुई है कि आखिर एक ही कक्षा में सभी बच्चों को कैसे पढ़ाएं.
वहीं प्रायमरी स्कूल में 120 बच्चों की क्लास दो ही कक्ष मे तीन शिक्षकों के भरोसे चलती है. शिक्षकों ने बताया कि यहां 120 बच्चों के पांच शिक्षक हैं, वहीं एक शिक्षक को अतिरिक्त प्रभार देते हुए अन्यत्र भेज दिया गया है. एक शिक्षक का काम प्रधान पाठक के कार्य के रूप में निकल जाता है. बचे तीन शिक्षक जो पांचवीं कक्षा तक अध्यापन कराते हैं. ऐसे में बच्चों का अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है.

Facebook Conversations