छत्तीसगढ़ का पारंपरिक पर्व छठ माताओं ने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत,,,,,,,, शिव वर्मा
राजनांदगांव। जिला भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष पार्षद दल के प्रवक्ता शिव वर्मा ने एक विज्ञप्ति जारी कर कहा कि छत्तीसगढ़ का पारंपरिक पर्व छठ माताओं ने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत उन्होंने कहा किछत्तीसगढ़ का पारंपरिक पर्व छठ माताओं ने बच्चों की लंबी उम्र के लिए रखा व्रत,,,,,,,,भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हल षष्ठी या बलराम जयंती मनाई जाती है। देश के विभिन्न भागों में इसे अलग अलग-अलग नामों से जाना जाता है। कहीं इसे पीन्नी छठ, खमर छठ, राधन छठ, चंदन छठ, तिनछठी, तिन्नी छठ, ललही छठ तो कहीं इसे हलछठ या हरछठ के नाम से पुकारा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने संतान की लंबी आयु और उसके स्वस्थ्य जीवन की कामना के लिए व्रत रखकर पूजन आदि करती हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान हलधर यानी कि बलराम जी उनके पुत्रों को लंबी आयु प्रदान करते हैं। वहीं संतान उत्पत्ति की भी कामना पूरी करते हैं। उत्तर भारत में यह विशेष रूप से मनाया जाता है।हिंदू पंचांंग के मुताबिक इस बार यह हलछठ 28 अगस्त दिन शनिवार को पड़ रही है। कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 27 अगस्त 2021 दिन शुक्रवार को शाम 6.50 बजे शुरू होगी और अगले दिन यानी 28 अगस्त शनिवार को रात्रि 8.55 बजे समाप्त होगी। इसलिए शनिवार को उदयातिथि पड़ने से हलछठ मनाई जाएगी। इस दिन को उत्तर भारत में हल षष्ठी और ललाही छठ के नाम से भी जाना जाता है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन को बलदेव छठ के नाम से जाना जाता है और गुजरात में इस दिन को रंधन छठ के रूप में मनाया जाता है।शास्त्रों के मुताबिक भगवान बलराम को भगवान विष्णु के 8वें अवतार के रूप में पूजा जाता है। बलराम भगवान कृष्ण के बड़े भाई थे। भगवान बलराम को आदिश के अवतार के रूप में भी पूजा जाता है, जिस नाग पर भगवान विष्णु विश्राम करते हैं। बलराम को बलदेव, बलभद्र और हलयुध के नाम से भी जाना जाता है*।

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