कृषि शिक्षा को मिला प्रैक्टिकल टच, छात्रों ने समझा आधुनिक पोल्ट्री फार्मिंग सिस्टम
त्वरित खबरे ;हर्ष कुमार गुप्ता (रेपोर्टिंग )

आज के दौर में कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि तकनीक और आधुनिक प्रबंधन के जरिए इसे एक सफल व्यवसाय के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय की छात्रा कुसुम रेड्डी ने अपने शैक्षणिक अध्ययन के तहत भिलाई-3 के पास स्थित औरी गांव के एक आधुनिक पोल्ट्री फार्म का दौरा किया। इस अध्ययन का उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देना और यह समझाना था कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पोल्ट्री फार्मिंग को किस तरह लाभकारी बिजनेस मॉडल बनाया जा सकता है।

अध्ययन के दौरान छात्रों ने देखा कि युवा उद्यमी प्रसंग चंद्राकर ने अपने फार्म को पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से विकसित किया है। उन्होंने पुणे से पोल्ट्री डिप्लोमा करने के बाद अपने ज्ञान और तकनीकी अनुभव का उपयोग करते हुए फार्म में एनवायरमेंट कंट्रोल हाउस तैयार किया है। इस सिस्टम के माध्यम से तापमान और आर्द्रता को ऑटोमेटिक तरीके से नियंत्रित किया जाता है, जिससे पक्षियों की मृत्यु दर कम होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है। छात्रों के लिए यह तकनीक बेहद आकर्षण का केंद्र रही।

फार्म में लागत कम करने के लिए सेल्फ-सस्टेनेबल मॉडल अपनाया गया है। यहां मक्का और सोयाबीन आधारित संतुलित फीड खुद तैयार की जाती है, जिससे बाजार पर निर्भरता कम होती है और खर्च नियंत्रित रहता है। साथ ही, बायो-सिक्योरिटी और नियमित टीकाकरण की सख्त व्यवस्था भी की गई है ताकि पक्षियों को बीमारियों से बचाया जा सके। कृषि छात्रों ने इसे आधुनिक फार्मिंग मैनेजमेंट का बेहतरीन उदाहरण बताया।

इस विजिट के माध्यम से छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि कृषि क्षेत्र में केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी उतना ही जरूरी है। सही प्रबंधन, तकनीक और मार्केट लिंकेज के जरिए पोल्ट्री फार्मिंग को रोजगार और आय का बड़ा माध्यम बनाया जा सकता है। कॉलेज प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आधुनिक फार्म भविष्य के कृषि स्नातकों के लिए किसी प्रयोगशाला से कम नहीं हैं, जहां उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में सीखने का अवसर मिलता है।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations