मंत्री-विधायकों को निर्देश जारी
बहनजी, भैयाजी, मतदान कर दिया क्या… अरे अभी नहीं किया तो प्लीज घर से बाहर निकलिए और देशहित के लिए मतदान जरूर कीजिए। 26 अप्रैल को मध्य प्रदेश की 6 लोकसभा सीट के मतदाताओं के पास इसी तरह के कॉल आने वाले हैं। पहले चरण में मतदान प्रतिशत घटने के बाद बीजेपी ने एक्शन प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत हर कार्यकर्ता को अपने क्षेत्र के मतदाताओं को कॉल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कार्यकर्ताओं को कॉल करने वाले मतदाताओं की सूची भी पार्टी को सौंपना होगी।
मध्य प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में 2019 की तुलना में अपना वोट बैंक 58 प्रतिशत से 10 प्रतिशत अधिक बढ़ाने का टारगेट तय किया है। भाजपा का मानना है कि जितना अधिक मतदान होगा बीजेपी का वोट बैंक उतना ही अधिक बढ़ेगा। जबकि 19 अप्रैल को पहले चरण में मध्य प्रदेश की छह सीटों पर हुए मतदान का प्रतिशत 2019 की तुलना में औसत 7.5 प्रतिशत कम रहा।प्रदेश में हुए कम मतदान को लेकर पार्टी एक्शन मोड में है। पार्टी ने अब बची 23 सीट पर बंपर मतदान कराने की योजना तैयार की है। सूत्रों की मानें तो पार्टी ने अधिक मतदान के लिए हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी तय कर दी है। इस नई रणनीति के तहत मतदान वाले दिन हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी रहेगी कि वो अपने क्षेत्र के मतदाताओं को कॉल करेम। कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी पन्ना समिति स्तर पर तय की गई है। पार्टी के इसके लिए सभी जिला पदाधिकारियों के साथ सभी जनप्रतिनिधि, विधायक, मंत्रियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।विधायक और विधानसभा का चुनाव लड़े नेताओं से कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में उनको जितने वोट मिले हैं उससे 10 प्रतिशत अधिक वोट पार्टी के पक्ष में करना है। चुनाव प्रभारियों के साथ मंत्रियों की जिम्मेदारी होगी कि दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाए। ये दिशा-निर्देश जारी होने के बाद पहली प्रैक्टिस 26 अप्रैल को टीकमगढ़, दमोह, खजुराहो, सतना, रीवा और होशंगाबाद सीट पर होने जा रही है।तीसरे और चौथे चरण को लेकर भी क्षेत्रीय नेता और कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इस संबंध में बीजेपी मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मतदाताओं को पहले से जागरूक करता आया है। पार्टी का कार्यकर्ता हर बाद मतदाताओं से मतदान की अपील करता है। वहीं कांग्रेस मीडिया प्रभारी मानक अग्रवाल ने कहा है कि जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। इसके रुझान पहले चरण के मतदान में देखने को मिले हैं।

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