छत्तीसगढ़। बेशकीमती जमीन को लेकर एक विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। एक ओर बुजुर्ग महिलाएं जमीन को अपनी पुश्तैनी जायदाद बताते हुए अपने हक के लिए खड़ी हैं, तो दूसरी ओर एक आवेदक संबंधित जमीन पर अपना कानूनी अधिकार होने का दावा कर रहा है। दोनों पक्षों के दावों के बीच जमीन का यह विवाद अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन की कीमत काफी अधिक है, जिसके चलते मामले में दोनों पक्ष अपने-अपने दस्तावेज और अधिकार का हवाला दे रहे हैं। बुजुर्ग महिलाओं का कहना है कि जमीन उनके परिवार से जुड़ी पुश्तैनी संपत्ति है और लंबे समय से उनका इस पर दावा रहा है। वहीं, आवेदक की ओर से जमीन पर अपने हक को लेकर आवेदन और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
मामले में दोनों पक्षों के दावों की वास्तविकता राजस्व रिकॉर्ड, पुराने दस्तावेज, जमीन के स्वामित्व और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी। विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायत/आवेदन दिए जाने की बात सामने आई है।
अब सवाल यह है कि जमीन के दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड में किसका अधिकार दर्ज है और वास्तविक स्वामित्व किसके पक्ष में जाता है। फिलहाल मामला जांच और दस्तावेजी पड़ताल का विषय बना हुआ है।

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