अबूझमाड़ के ग्रामीण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को देखने उमड़ी हजारों लोगों की भीड़
त्वरित ख़बरें - अबूझमाड़ के ग्रामीण CM का स्वागत करने ढोल लेकर पहुंचे

दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार-पाहुरनार घाट पर इंद्रावती नदी पर बने पुल का उद्घाटन करने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहुंचे। यहां CM को देखने और उनके स्वागत के लिए अबूझमाड़ के सैकड़ों ग्रामीण भी आए। जिन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री को देखा। वे काफी खुश हुए। पुल का उद्घाटन करने के बाद अबूझमाड़ के ग्रामीणों से CM ने मुलाकात भी की।

इस दौरान सीएम ने एक ग्रामीण से पूछा, पुल बना है अब आप को कैसा लग रहा है? जिसका जवाब देते हुए ग्रामीण ने कहा कि पुल बनने से हम बेहद खुश हैं। हमारी राह अब आसान हो गई है। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने ग्रामीणों से ढोल लिया और पुल के ऊपर ही ग्रामीणों के साथ ढोल बजाकर झूमने लगे। ग्रामीणों ने CM से कहा कि हम आप को पहली बार देख रहे हैं। बहुत खुशी हो रही है।

दरअसल, बस्तर का अबूझमाड़ जिसे पूरी तरह से माओवादियों का गढ़ कहा जाता है। इलाके के लोग मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोकतंत्र नहीं बल्कि नक्सलियों का गनतंत्र चलता है। अबूझमाड़ के कुछ गांव के ग्रामीणों ने वोट डालकर सरकार तो बना लिया था। लेकिन वे नहीं जानते थे कि उनके मुख्यमंत्री कौन है? विधायक कौन है? लेकिन, जब उन्हें पता चला कि इंद्रावती नदी पर उनके लिए जो विकास का पुल बनाया गया है, उसका उद्घाटन करने CM आ रहे हैं तो सैकड़ों ग्रामीण ढोल लेकर स्वागत के लिए खुद पहुंच गए।

इंद्रावती नदी पार के -पाहुरनार, चेरपाल, कौरगांव, छोटे करका, बड़े करका समेत अन्य गांव के ग्रामीण मुख्यमंत्री को देखने के लिए पुल पर सुबह से ही आ गए थे। ग्रामीणों ने कहा कि, 25 जनवरी हमारे लिए दोहरी खुशी का दिन है। हमें पुल तो मिल रहा है लेकिन हम पहली बार CM को भी देखे हैं। उनसे मुलाकात कर बात भी की। CM से मिलकर खुश हैं। ग्रामीणों ने कहा कि नदी पर पुल नहीं था, उन्हें बहुत तकलीफों का सामना करना पड़ता था। हर साल नदी में नाव पलटने से गांव के किसी न किसी घर से एक सदस्य की मौत होती थी। लेकिन अब पुल का निर्माण हो गया है। उन्हें नया जीवन मिला है।

अजित जोगी और डॉ रमन सिंह का भी सुने थे नाम, देखे नहीं
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी और 15 सालों तक सत्ता में रहे भाजपा के डॉ रमन सिंह का नाम अबूझमाड़ के कुछ ही ग्रामीणों ने नाम सुना था। ग्रामीणों ने बताया कि हमने अजित जोगी और डॉ रमन सिंह को सामने से नहीं देखा था। क्योंकि ये दोनों मुख्यमंत्री कभी इस इलाके तक पहुंचे नहीं ही। केवल होडिंग्स और तस्वीरों में ही देखे थे।

नाव में सवार होकर पहुंचते थे वोट डालने
अबूझमाड़ के ग्रामीणों ने बताया कि, नदी के नजदीक वाले गांव के कुछ ही ग्रामीण वोट डालने के इंद्रावती नदी को लकड़ी की छोटी नाव से पार कर जाते थे। वोट डाल अपने मताधिकार का प्रयोग करते थे। लेकिन जब लौटते तो नक्सलियों का खौफ भी होता था। इसलिए उंगली में लगी अमिट स्याही को मिटा देते थे। इन्होंने सरकार बनाने अपनी भूमिका तो निभाई। लेकिन इलाके के ग्रामीण विधायक और मंत्रियों को आज भी नहीं जानते।

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