जिले में संचालित 82 निजी अस्पताल, पैथोलॉजी सेंटर, डेंटल ओपीडी और क्लीनिक की जांच होगी। नर्सिंग होम एक्ट की रायपुर में हुई राज्य स्तरीय बैठक के बाद स्वास्थ विभाग हरकत में आ गया है। सीएमएचओ डॉ गंभीर सिंह ने मंगलवार को लाइसेंस लेने वाले सभी अस्पतालों, पैथोलॉजी सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर, डेंटल ओपीडी और क्लीनिक की जांच करने के आदेश दे दिए हैं।
इसके लिए उन्होंने कुल 9 टीमें बनाई। 6 टीम को शहर के संस्थानों की और 3 टीम को उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र के संस्थानों की जांच के लिए बनाई है। सभी टीम हर रोज 5 संस्थानों की नर्सिंग होम एक्ट के तय मानकों पर जांच करेंगी। हर टीम में एक डॉक्टर के अलावा, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और फायर ब्रिगेड के अधिकारी को भी शामिल किया गया है। 17 नवंबर को रायपुर में प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी। जिसमें संचालक ने सबसे अपने-अपने जिले के लाइसेंस धारी अस्पतालों का डाटा मांगा था। इसके बाद वहां से सबके जांच कराने का आदेश दिया गया। आदेश मिलने के बाद दुर्ग में जांच का निर्णय लिया गया।
9 टीमें बनाईं, सभी टीमों के प्रभारी भी तय किए गए
सीएमएचओ ने 9 टीमों का गठन किया है। इसमें डॉ. सतीश कुमार मेश्राम को 11, डॉ. सुगम सावंत को 13, डॉ. आरके खंडेलवाल को 12, डॉ. अनिल शुक्ला को 8, डॉ. सीबीएस बंजारे को 11, डॉ. अर्चना चौहान को 10, बीएमओ पाटन को 6, बीएमओ धमधा को 4 और बीएमओ निकुम को 7 संस्थाओं की जांच सौंपी गई है। उन्हें जांच कर रिपोर्ट देनी है।
इन बिंदुओं पर होगी जांच टीम को दी गई ट्रेनिंग
जांच टीम हर अस्पताल के कुल 13 बिंदुओं पर जांच करेगी। इसके तहत अस्पताल की ओपीडी एरिया, कैजुअल्टी, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड, लेबर रूम आदि को नर्सिंग होम एक्ट के मानकों अनुसार देखा जाएगा। टीम इसके लिए तय फॉर्मेट पर अपनी रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंपेगी। टीम को ट्रेनिंग भी दी गई है। ताकि किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
अस्पतालों में औचक रूप से पहुंचेंगे टीम के सदस्य
जांच के लिए बनाई गई सभी टीम को अपने अपने क्षेत्र के अस्पतालों में जाना होगा। कोरोनाकाल की तरह इस बार ऑनलाइन जांच नहीं होगी। जांच टीम को संस्थानों में मिलाने वाली व्यवस्था को तय फॉर्मेट के अनुसार भरकर अपने टिप्पणी सहित देना होगा। टीम के सदस्य औचक रूप से जांच के लिए पहुंचेंगे। साथ ही अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे।
जिनके आवेदन पेंडिंग उनकी कोई जांच नहीं होगी
नर्सिंग होम एक्ट के तहत जिन अस्पतालों, क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर व डेंटल क्लीनिक के आवेदन पेंडिंग है, उनकी कोई जांच नहीं होगी। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग ने इनके आवेदन तो ले लिए लेकिन अब तक लाइसेंस निरस्त नहीं किए हैं। इनकी संख्या लगभग 150 है। शासन स्तर पर इस पर निर्णय होना है।
लापरवाही सामने आने के बाद जारी होगा नोटिस, अर्थदंड सहित अन्य कार्रवाई भी
सभी अस्पतालों की जांच में खामी मिलने पर नोटिस जारी की जाएगी। नर्सिंग होम एक्ट के मानकों अनुसार इंतजाम करने के लिए संबंधित अस्पताल को समय दिया जाएगा। इसके बाद भी व्यवस्था आपको डेट ना करने पर सीलिंग की कार्रवाई होगी। वर्ष 2016 में भी इसी प्रकार की जांच अस्पतालों की गई थी। इसके बाद पुन: इसकी शुरुआत की जा रही है। ताकि अस्पतालों की व्यवस्था में सुधार आए।
9 टीमें करेंगी जांच, रिपोर्ट के आधार पर उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई
नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस प्राप्त करने वाले जिले के सभी अस्पताल, क्लीनिक, पैथोलॉजी सेंटर व डेंटल क्लीनिक की जांच की जाएगी। इसके लिए 9 टीमें बनाई गई हैं। हर टीम अपने क्षेत्र के संस्थानों के नर्सिंग होम एक्ट के मानकों पर आकलन कर रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके आधार पर उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन के बाद कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर, सीएमएचओ दुर्ग

Facebook Conversations