17 हजार हेक्टेयर में धान कटाई अब भी बाकी, बारिश हुई तो नुकसान तय
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जिले में दो दिन तक चक्रवाती तूफान जवाद के असर से मौसम में उतार-चढ़ाव होने का अनुमान है। बारिश होने की संभावना कम है बावजूृद किसान चिंतित हैं क्योंकि सिर्फ बादल छाए रहने से भी नुकसान का सामना करना पड़ेगा क्योंकि पहले से ही माहू सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आने से धान की उपज कम होने व क्वालिटी पर असर पड़ने का अनुमान विभागीय अफसर भी लगा रहे हैं।

पहले से ही तनाछेदक व अन्य बीमारियों की वजह से किसान परेशान रहे। अब मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बादल छाए रहने से किसान चिंतित है क्योंकि अभी खेतों में धान की कटाई, मिंजाई का सिलसिला जारी ही है। ऐसे में मौसम में बदलाव होने से नुकसान उठाना पड़ सकता है। कृषि विभाग के अनुसार जिले के सभी ब्लॉक में लगभग 10% यानी 17 हजार हेक्टेयर में धान की फसल खड़ी है। अधिकतर किसानों के सामने अभी यह समस्या है कि खेत गीला होने से हार्वेस्टर थ्रेसर का सहारा भी नहीं ले पा रहे हैं। मजदूरों के भरोसे हैं। लिहाजा कटाई होना बाकी है। वहीं कृषि विभाग के अनुसार 90% यानी 1 लाख 58 हजार हेक्टेयर में धान की कटाई कंपलीट हो चुकी है।

बेचने के लिए जल्दी मिंजाई करवाना चाह रहे
एक दिसंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू हो गई है। इसलिए ज्यादातर किसान जल्द कटाई, मिंजाई करवाने के बाद उपज को बेचने केंद्र ले जाना चाह रहे हैं। वर्तमान में मौसम का मिजाज बदलने की वजह से अधिकतर किसान हार्वेस्टर, थ्रेसर के भरोसे जल्दी मिंजाई करवाना चाह रहे हैं ताकि नुकसान का सामना न करना पड़े लेकिन खेत गीला होने से मजदूरों के भरोसे भी कटाई हो रही है।

रोजाना कलेक्टर जनमेजय महोबे, कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारी अपने स्तर पर खेतों में पहुंचने वाले अफसरों, कर्मचारियों, पटवारियों से वास्तविकता पता कर रहे है। कृषि विभाग के अनुसार शत प्रतिशत रकबे में लगी धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है। अगर बारिश होगी तो भीगने के बाद लालिमा आने और दाना खराब होने की आशंका है। कृषि विभाग के उपसंचालक नागेश्वर लाल ने बताया कि अधिकांश किसान कटाई, मिंजाई करवा चुके है।

33% से ज्यादा नुकसान होने पर मिलेगा लाभ
कुल रकबा में लगे धान का 33% से ज्यादा नुकसान होने पर प्रति हेक्टेयर 6850 रुपए असिंचित और 13500 रुपए सिंचित देने का प्रावधान तय किया गया है। इसके अलावा नुकसान होने की स्थिति में फसल बीमा का लाभ भी मिलता है। विभागीय अफसरों की ओर से वेरिफिकेशन के बाद रिपोर्ट भेजी जाती है। जिसके आधार पर शासन की ओर से किसानों को राहत देने निर्देश दिए जाते हैं।

1 लाख 75 हजार 823 हेक्टेयर में खेती
कृषि विभाग के अनुसार इस खरीफ सीजन 6 तहसील में एक लाख 75 हजार 823 हेक्टेयर रकबे में धान लगी है। जो निर्धारित लक्ष्य से 3453 हेक्टेयर ज्यादा है। एक लाख 72 हजार 370 हेक्टेयर में धान बोआई का लक्ष्य तय था। नवंबर के अंतिम सप्ताह के बाद से धान की कटाई, मिंजाई में तेजी आई है।

यहां देरी से बुआई हुई फसल अभी तैयार नहीं
बालोद ब्लॉक में अब तक 80% रकबे में लगी धान फसल की कटाई हो पाई है। वजह यह है कि यहां दूसरे ब्लॉक की तुलना में किसानों ने देरी से बुआई की है। वहीं डौंडीलोहारा, गुंडरदेही, गुरूर और डौंडी ब्लॉक में 85-90% से अधिक रकबे में लगी धान की कटाई हो चुकी है। वर्तमान में अधिकांश किसान सुविधा अनुसार मिंजाई करवा रहे है। कृषि विभाग के अफसर, विस्तार अधिकारी व राजस्व विभाग के आरआई, पटवारी किसानों से चर्चा कर कृषि कार्य के संबंध में जानकारी ले रहे है। हालात अनुसार खेतों में भी पहुंच रहे हैं।

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