ऐसे गांव की कहानी, जहां 1000 परिवारों में 30 जोड़े लोग जुड़वा

त्वरित ख़बरें - पोलिंग बूथ का स्टाफ भी हैरान-परेशान; शक्ल कहती है कि ये वोट दे चुके, लेकिन कागज कहते हैं कि इन्हें वोट देना है

यूपी के चुनाव के पांचवें चरण के पोलिंग डे के अगले दिन हम आपको ऐसे गांव की कहानी पढ़वाने जा रहे हैं, जहां 1000 परिवारों में 30 जोड़े लोग जुड़वा हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में गांव के लोग इनकी पहचान को लेकर कन्फ्यूज होते ही थे, लेकिन पोलिंग डे पर बूथ स्टाफ के परेशान होने की बारी थी।

गांव के ही एक बूथ पर पांचवें चरण की वोटिंग के दौरान जब एक ही शक्ल के एक से अधिक लोग पहुंचने लगे। तो बूथ स्टाफ परेशान हुआ। घालमेल की आशंका में दस्तावेजों से नाम-पता मिलान कराए गए। तब जाकर पोलिंग बूथ के स्टाफ को जुड़वा लोगों के इस गांव के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद बहुत सावधानी से बूथ पर वोटिंग कराई गई।

पोलिंग बूथ पर शुरुआत अमित और विपिन, दो भाइयों के पहुंचने पर हुई। सबसे पहले अमित ने वोट दिया। उनके दस्तावेज देखने के बाद उन्हें मताधिकार का प्रयोग करने दिया गया। कुछ देर बाद विपिन भी वोट देने के लिए उसी बूथ कक्ष में पहुंचे। अब स्टाफ उनकी शक्ल देखकर ठिठक गया। क्योंकि इसी शक्ल का एक व्यक्ति पहले ही वोट दे चुका था। पर्ची और आधार कार्ड में कुछ और नाम लिखा था।

पोलिंग बूथ का स्टाफ किसी भी तरह से यह मानने को तैयार नहीं हो पा रहा था कि सामने खड़ा शख्स कोई दूसरा व्यक्ति है। पुलिस बुलाकर विपिन को उन्हें सौंपा गया। पूछताछ के बाद खुलासा हुआ कि ये दोनों जुड़वा भाई हैं।

अमित का कहना है कि पिछले चुनाव में सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें पोलिंग बूथ के अंदर ही पकड़ लिया था। वो कह रहे थे कि तुम दोबारा वोट देने आए हो। उस वक्त उनकी मां और भाई उसी परिसर में मौजूद थे। लिहाजा सुरक्षाकर्मियों को समझाना आसान हो गया। प्रयागराज के मोहम्मदीपुर उमरी में जुड़वा बच्चों पर रिसर्च भी हो चुकी है। गांव के लोगों के ब्लड और सलाइवा के नमूने भी लिए गए थे। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका। अब भी गांव में बच्चे जुड़वा पैदा हो रहे हैं।

यूपी में पांचवें चरण में रविवार को रायबरेली, बहराइच, प्रयागराज, अयोध्या, अमेठी, सुल्तानपुर, चित्रकूट, गोंडा समेत 12 जिलों की 61 सीटों पर मतदान हुआ।

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