नित्यानंद त्रयोदशी  10 फरवरी 2025 को भिलाई के सेक्टर-६ अक्षय पात्र प्रांगण में स्थित, हरे कृष्णा मूवमेंट में नित्यानंद त्रयोदशी का आयोजन किया गया...
त्वरित खबरें निशा विश्वास ब्यूरो प्रमुख रिर्पोटिंग

 नित्यानंद त्रयोदशी

10 फरवरी 2025 को भिलाई के सेक्टर-६ अक्षय पात्र प्रांगण में स्थित, हरे कृष्णा मूवमेंट में नित्यानंद त्रयोदशी का आयोजन किया गया ।  नित्यानंद त्रयोदशी भगवान  नित्यानंद के आविर्भाव की पावन तिथि है। परम भगवान स्वयं  कृष्ण ने पश्चिम बंगाल स्थित नबद्वीप धाम में चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतरित हो इस कलियुग में हरि-नाम संकीर्तन महायज्ञ का सूत्रपात किया। भगवान  कृष्ण के इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु स्वयं बलराम जी,  नित्यानंद प्रभु के रूप में प्रकट हुए।  नित्यानंद प्रभु ने भगवान् के पवित्र नाम को बंगाल के प्रत्येक गांव में जा कर प्रचार किया।

नित्यानंद प्रभु का आविर्भाव एकचक्र नामक गांव (वर्त्तमान में बीरभूम जिला, पश्चिम बंगाल ) में पद्मावती एवं हड़ै पंडित के पुत्र के रूप में सन १४७४ में  हुआ। उनका जन्म माघ महीना में शुक्ल पक्ष के तेरहवें दिन हुआ। आज भी भक्त गण  नित्यानंद प्रभु के दिव्य अनुकम्पा की आस में उनकी जन्मभूमि की यात्रा करते हैं ।

 नित्यानंद प्रभु, भगवान् चैतन्य महाप्रभु के शाश्वत अनुयायी हैं । वैष्णव आचार्य  बताते हैं कि भगवान  चैतन्य महाप्रभु की शरण के लिए नित्यानंद प्रभु का आशीर्वाद आवश्यक है। अतएव जो जीवात्मा वास्तव में महाप्रभु की शरण प्राप्त करना चाहते हैं, उनका प्रथम लक्ष्य  नित्यानंद प्रभु को आदिगुरु के रूप में स्वीकारना है।

इस पावन अवसर पर भगवान के विग्रहों का भव्य अभिषेक किया गया । भव्य अभिषेक में विग्रहों को इत्र एवं अन्य सुगन्धित तरल से स्नान करने के पश्चात  चन्दन का लेप लगाया गया | भगवान् को चन्दन का लेप लगाने के बाद पुनः पंचगव्य (शहद, दूध, घी, दही और इत्र का मिश्रण )  से स्नान कराया गया । उसके बाद विग्रहों को सर्व-औषधय स्नान एवं १०८ कलश स्नान  एवं फल फल पुष्प स्नान कराया गया। तदोपरांत भगवान  चैतन्य महाप्रभु एवं नित्यानंद प्रभु की दिव्य पालकी उत्सव का प्रारम्भ हुआ |  महोत्सव के अंत में सभी भक्त गणो को भगवान का प्रसाद वितरण किया गया |

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