विदेशी फंडिंग और TTI ट्रेनिंग मॉड्यूल पर सवाल: छत्तीसगढ़ में 95 करोड़ के उपयोग की जांच तेज
त्वरित ख़बरें : ज़ाफ़रान खान रिपोर्टिंग

रायपुर छत्तीसगढ़ में विदेशी फंडिंग और उससे जुड़े गतिविधियों को लेकर इन दिनों चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार बीते छह महीनों में राज्य में लगभग 95 करोड़ रुपये की विदेशी राशि विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से आई है, जिसके उपयोग और उद्देश्य की जांच की जा रही है। खासकर बस्तर और धमतरी जैसे क्षेत्रों में सक्रिय कुछ संगठनों के ट्रेनिंग मॉड्यूल को लेकर सवाल उठे हैं, जिनमें TTI (ट्रेनिंग से जुड़ी एक इकाई) का नाम सामने आ रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन फंड्स का इस्तेमाल किस प्रकार के कार्यक्रमों और गतिविधियों में किया गया, और क्या इनका उपयोग निर्धारित नियमों व दिशा-निर्देशों के अनुरूप हुआ या नहीं।

अधिकारियों का कहना है कि विदेशी फंडिंग अपने आप में अवैध नहीं होती, लेकिन इसके उपयोग को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन जरूरी है। यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे संवेदनशील सामाजिक मुद्दों से जोड़कर सतर्कता बरतने की जरूरत बता रहे हैं। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले समय में इसके निष्कर्ष स्थिति को और स्पष्ट करेंगे।

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