शिक्षा का अधिकार कानून के तहत गरीब और कमजोर वर्ग समूह के बच्चों को निजी स्कूलों में आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों में भर्ती कराना है। इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की है। वहीं भर्ती हुए बच्चों के एवज में निजी स्कूलों को प्रतिपूर्ति की राशि भी शिक्षा विभाग के माध्यम से ही जारी होती है पर विभाग की ओर से प्रतिपूर्ति की राशि जारी करने में बड़ी गड़बड़ी की जा रही है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में कई तथ्य चौकाने वाले सामने आएं हैं। विभाग की ओर से उन स्कूलों को अधिक राशि जारी कर दी गई है जहां पर गिनती के बच्चे पढ़ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमनारायण वर्मा की ओर से मांगी गई जानकारी में प्रतिपूर्ति की राशि वितरण में जमकर मनमानी किए जाने का खुलासा हो रहा है। वर्ष 2011 से लेकर 2019 तक करोड़ों रुपए स्कूलों को जारी हुए हैं। विभाग को यह भी जानकारी नहीं है कि किस स्कूल में कितने बच्चे पढ़ते हैं? छमुमो अध्यक्ष वर्मा ने कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर आरटीई की प्रतिपूर्ति राशि के वितरण में हुई गड़बड़ी की जांच कर दोषियों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
विधानसभा में दो बार दी गई जानकारी
बताया है कि जिले में आरटीई के अंतर्गत निजी स्कूलों में कितने गरीब बच्चे किस स्कूल में पढ़ रहे हैं?इसकी जानकारी डीईओ कार्यालय के पास नहीं है। कोरोना काल में कितने स्कूल बंद हुए और इन बंद स्कूलों में आरटीई के कितने बच्चे किस स्कूल में पढ़ रहे थे। इसकी भी जानकारी विभाग के पास नही है। शिक्षा विभाग की ओर से भुगतान के संबंध में दो बार विधान सभा में बच्चों की जानकारी भेजी गई और अब कह रहे हैं कि किस स्कूल में कितने बच्चे पढ़ रहे हैं? इसकी जानकारी विभाग के पास नही है, यह समझ से परे है।

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