साउथ दिल्ली से ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले फर्जी कॉल सेंटर संचालक गिरफ्तार,
त्वरित ख़बरें - गिरोह ने इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा दिलाने का झांसा देकर 3 साल में 4 राज्यों में 2.16 करोड़ रुपए की ठगी की,

 भिलाई - सायबर सेल की टीम ने साउथ दिल्ली से ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले फर्जी कॉल सेंटर संचालक साजिद अली, उसके भाई सलीम जफर, राजू यादव और रंजन यादव को गिरफ्तार किया है। गिरोह ने इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा दिलाने का झांसा देकर 3 साल में 4 राज्यों में 2.16 करोड़ रुपए की ठगी की है। गिरोह ने मोहन नगर के सूर्या नगर सिकोला भाठा निवासी प्रभाकर राव दानीकर से 16.15 लाख रुपए की ठगी की थी।

ठगी का शिकार होने के बाद बीएसएनएल से रिटायर्ड टेक्नीशियन प्रभाकर की शिकायत पर 16 जून 2019 को शिकायत की। गिरोह ने टेक्नीशियन से इंश्योरेंस पॉलिसी के 4 लाख रुपए दिलाने का झांसा देकर टैक्स, जीएसटी, प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर वर्ष 2018 से 2019 के बीच 16.15 लाख रुपए ठग लिए थे। मास्टरमाइंड साजिद ने बताया था कि उसका घाघरा चोली का बिजनेस है। आरोपियों से 4 अकाउंट से 156 लाख रिकवर हुए।

4 लाख रु दिलाने का झांसा देकर ठगे 16 लाख
एसएसपी बीएन मीणा के मुताबिक चारों आरोपियों को साउथ दिल्ली के महारानी बाग से गिरफ्तार किया गया है। गिरोह ने प्रार्थी से सीजीआईएस (सेंट्रल गवर्नमेंट इमप्लाय ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम) का कर्मचारी और अधिकारी बनकर संपर्क किया था। आरोपियों ने खुद को डायरेक्टर, मैनेजर, कर्मचारी बनकर पीड़ित से संपर्क किया। पूछताछ के बाद पता चला कि गिरोह ने गुजरात में 1.50 करोड़, चेन्नई में 25 लाख, पंजाब में 36 हजार और एमपी में 25 लाख ठगे। इस तरह गिरोह काम करता रहा।

एनजीओ का पैसा 20 से 25% देखकर खाते में करते थे ट्रांसफर

आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि ठगी का पैसा अलग-अलग बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए खाताधारियों को 20 से 25 % कमीशन देते थे। खाते में पैसा ट्रांसफर करने के लिए खाताधारकों को एनजीओ का पैसा डिपॉजिट होने का झांसा देकर जमा करवा लेते थे। पुलिस के मुताबिक पुलिस टीम ने आरोपियों को पकड़ने के पहले मोबाइल की डिटेल व सोशल मीडिया से आरोपियों की तस्वीर जुटाई। इसके बाद तीन दिनों तक आरोपी चाय वाले राजू की दुकान पर बैठकर बाकियों की रैकी की। इसके बाद चारो आरोपियों की पहचान होने के बाद एक ही समय पर पकड़ लिया। चारों को स्थानीय कोर्ट में पेश करके ट्रांजिट रिमांड पर दुर्ग लाया गया। कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया।

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