दुर्ग। साइबर अपराध के पीड़ितों को ठगी गई राशि जल्द वापस दिलाने के उद्देश्य से 24 जून 2026 को दधीचि सभागार, पुलिस लाइन दुर्ग में GRM (Grievance Redressal Mechanism) एवं MRM (Money Restoration Module) के प्रभावी संचालन को लेकर रेंज स्तरीय व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल की उपस्थिति रही। मुख्य वक्ता सहायक पुलिस महानिरीक्षक कवि गुप्ता ने पुलिस अधिकारियों और बैंक प्रबंधकों को GRM पोर्टल पर प्राप्त साइबर शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा MRM के जरिए ठगी की राशि पीड़ितों को वापस कराने की प्रक्रिया की जानकारी दी।
प्रशिक्षण में बताया गया कि साइबर ठगी की सूचना मिलते ही पुलिस और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान के बीच तत्काल समन्वय कर ठगी की रकम पर होल्ड एवं लियन लगाया जा सकता है। इसके बाद आवश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से पीड़ित को राशि वापस दिलाने की कार्रवाई की जाती है।
कार्यशाला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) शोभराज अग्रवाल, नगर पुलिस अधीक्षक दुर्ग हर्षित मेहर, उप पुलिस अधीक्षक (रेंज साइबर थाना) अनूप लकड़ा और उप पुलिस अधीक्षक (ACCU) यदुमणि सिदार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। दुर्ग, बेमेतरा और बालोद जिले के 45 बैंक मैनेजर तथा 50 से अधिक साइबर कमांडो ने प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध की शिकायत मिलने के बाद पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच त्वरित समन्वय स्थापित करना, ठगी की रकम को समय रहते सुरक्षित कराना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत पीड़ितों को राशि वापस दिलाने की कार्रवाई को प्रभावी बनाना रहा।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर बिना देरी 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और तत्काल अपने बैंक को भी सूचना दें। समय पर सूचना मिलने से ठगी की राशि को होल्ड कराने की संभावना बढ़ती है। साथ ही नागरिकों से OTP, PIN, बैंकिंग जानकारी और अन्य गोपनीय विवरण किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की अपील की गई है।

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