गरियाबंद। रक्षाबंधन का पर्व गरियाबंद जिले की बिहान से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के लिए भाई-बहन के स्नेह के साथ आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी बन गया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर के मार्गदर्शन में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर उन्हें बाजार में बेच रही हैं।
मैनपुर विकासखंड में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने 5,340 रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 11,258 रुपये की बिक्री की है। वहीं गरियाबंद विकासखंड में संजीवनी संकुल संगठन जोबा से जुड़ी गायत्री स्व-सहायता समूह, सढ़ौली की चार महिलाएं धान-चावल, मूंगा, मटर, झरगा, सेमी और अरहर जैसी स्थानीय सामग्री से अलग-अलग डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इन राखियों की कीमत 5 से 60 रुपये तक रखी गई है।
बांस की राखियों की भी बढ़ी मांग
छुरा विकासखंड के ग्राम जामली स्थित जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बांस से राखियां तैयार कर बाजार तक पहुंचाने की पहल की है। समूह ने इस वर्ष करीब 1 हजार राखियों का स्टॉक तैयार किया है, जिन्हें रक्षाबंधन के अवसर पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम पंचायत रोहिना की जय मां घटारानी स्व-सहायता समूह की सदस्य कोयल साहू ने करीब 5 हजार राखियां तैयार की हैं। 5 से 40 रुपये तक की कीमत वाली इन राखियों में कई आकर्षक डिजाइन शामिल हैं। समूह ने 10 हजार रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 12 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की है। वर्तमान में करीब 4 हजार राखियां उपलब्ध हैं, जिनसे अनुमानित रूप से 16 हजार रुपये तक की बिक्री होने की उम्मीद है।
जनपद पंचायतों में लगाए जा रहे राखी बिक्री स्टॉल
बिहान की महिलाओं द्वारा तैयार राखियों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिले की सभी जनपद पंचायतों में केनोपी के माध्यम से राखी बिक्री स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इन स्टॉलों पर नागरिकों को हस्तनिर्मित और स्थानीय सामग्री से तैयार राखियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अलावा जिला प्रशासन गरियाबंद द्वारा आकांक्षा हाट में 21 से 28 अगस्त 2026 तक विशेष राखी बिक्री स्टॉल लगाया गया है। यहां बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय किया जा रहा है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर
जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा बिहान के माध्यम से महिलाओं को उद्यमिता विकास, कौशल उन्नयन, वित्तीय समावेशन, उत्पाद निर्माण और बाजार से जुड़ाव के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। राखी निर्माण जैसी गतिविधियों से महिलाओं को घर और गांव के स्तर पर रोजगार के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिल रहा है।
जिला प्रशासन ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि रक्षाबंधन के अवसर पर बिहान स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय और हस्तनिर्मित राखियों को प्राथमिकता दें, ताकि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल सके।

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