पढ़ाई का दबाव, विपरीत परीक्षा परिणाम,ऐसा डर कि बच्चे उठा रहे गलत कदम,
त्वरित ख़बरें -बच्चे समस्या का सामना करने की बजाय घर छोड़कर भागने का रास्ता चुन रहे हैं,
-बच्चों की दूसरों से तुलना न करें,बच्चों से बेहतर संवाद स्थापित करें, उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखें,

पढ़ाई का दबाव, विपरीत परीक्षा परिणाम, परिवार व समाज का दबाव और संवाद में कमी बच्चों को समस्या से भागने पर मजबूर कर रही है। बच्चे मोबाइल की इतनी ज्यादा लत लग रही है कि वो इससे दूर होते ही या तो डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं या फिर उनमें नकारात्मकता आ जाती है।

यही वजह है कि बच्चे समस्या का सामना करने की बजाय घर छोड़कर भागने का रास्ता चुन रहे हैं। पुलिस के तीन महीने का आंकड़ा बताता है कि जिले में जनवरी से अब तक 53 बच्चे घर छोड़कर जा चुके हैं। इनमें पुलिस ने 35 बच्चों को आसपास के शहर या फिर दूसरे राज्यों से बरामद किया है। लेकिन 18 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें पुलिस अब तक तलाश रही है। पुलिस के मुताबिक वर्ष 2021 में गायब 23 बच्चों को भी जनवरी से मार्च के बीच में बरामद किया गया है। इनमें नाबालिगों में बालक और बालिका शामिल हैं। नाबालिग बालिकाएं अक्सर दूसरे के बहकावे में आने के कारण घर छोड़कर चली जाती हैं। लगातार ऐसे केस सामने आ रहे हैं।

ऐसे तीन केस, जिसमें बच्चों ने पढ़ाई के प्रेशर की वजह से यह कदम उठाया

रिजल्ट बिगड़ने के डर से घर छोड़कर निकला 9वीं का छात्र : मोहन नगर थाना क्षेत्र के दीपक नगर इलाके से पूर्व पार्षद विजय जलकारे का 15 वर्षीय बेटा श्रेयस 23 मार्च से गायब है। सीएसपी जितेंद्र यादव के मुताबिक उसके दोस्त आदित्य ने बताया कि 22 मार्च को श्रेयस ने बताया था कि उसका कक्षा 9वीं का रिजल्ट आने वाला है। पेपर बिगड़ गया था, इस वजह से घर छोड़कर चला जाएगा। उसे ऑनलाइन गेम की भी लत थी। जनवरी गुमशुदगी-12 दस्तयाबी-08

बच्चों के घर छोड़कर जाने के प्रमुख कारण

  • बिना बच्चों की क्षमता व रूचि जाने उन पर पढ़ाई का प्रेशर बनाना।
  • अपनी अपेक्षाएं पूरी करने के लिए माता-पिता परीक्षा में अच्छे मार्क्स और रैंक लाने का दबाव बनाना
  • परिजन और बच्चों के बीच अच्छा संवाद नहीं होना।
  • कई बार बच्चे अपनी परेशानी दूर करने के लिए नशे की तरफ मुड़ जाते हैं।
  • छोटी उम्र में ही बच्चों के हाथों में मोबाइल देना।

बच्चों की दूसरों से तुलना न करें, संवाद बनाएं: एक्सपर्ट
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद गुप्ता के अनुसार माता-पिता या परिजन बच्चों से बेहतर संवाद स्थापित करें। उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखें। उनकी मनोदशा समझने के लिए उनके दोस्तों से भी बात करें। बच्चों की तुलना उनके भाई, बहन या दोस्तों से कभी न करें। इससे उनके मन में नकारात्मकता आती है। बच्चों के एक्सपेक्टेशन और इमोशन को समझें। कम उम्र में ही बच्चों के हाथ में मोबाइल न थमाएं।

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