मोहरी के मोहक कलाकार राधेसिंह गंधर्व
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 9  अप्रैल  छत्तीसगढ़ म कोनो भी विधा म कलाकार मन के कमी नई हे, बस जरवत हे वोमन ल तरासे के अऊ मंच देय के। अइसे केहे जाथे न कि बड़का कलाकार तो गाँव के माटी ले जुड़े मनखे मन ले ही निकल के आथे अऊ ये बात ल सिद्ध करथे श्री राधेसिंह गंधर्व जी ह , जेन छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर म बसे गांव वनांचल क्षेत्र बालोद जिला के डौंडीलोहारा के एक छोटे से गांव गुरामी म 22 फरवरी 1962 म जनम पाइस, कक्षा दुसरी तक के ही शिक्षा प्राप्त करे के बाद घलो आज वोमन वो कारज ल करत हे जउन ल कोनो विधिवत संगीत के शिक्षा लेवईया कलाकार मन नई कर पावत हे। जी हाँ, मय बात करत हंव राधेसिंह गंधर्व के संगीत के संग म जुड़ाव के , जेन सुसिर वाद्ययंत्र के मोहरी (शहनाई) के वादन करथे। बात मोहरी के करन त येला वादन करे बर केवल अऊ केवल सांस के ही खेल हे भले ही अंगरी के घलो अपन महत्ता हे। मोहरी (शहनाई) वादन के क्षेत्र म राष्ट्रीय स्तर म बड़का नाम के बात करन त वो नाम रिहिस उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब । जहां तक हमर छत्तीसगढ़ राज्य के बात करन त मोहरी वादन म पारंगत कलाकार रिहिस श्री गंधर्व जइसे ही छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर के माटी ले जुड़े कलाकार श्री पंचराम देवदास जी, जउन राजनांदगांव के आमगांव के रहवइया रिहिस, जिंखर भी मोहरी वादन म बड़का नाम रिहिस। 

बात श्री राधेसिंह गंधर्व के करन त येमन कोनो संगीत के या फेर मोहरी वादन के विधिवत शिक्षा नई लेय हे। इंखर पिताजी स्व. श्री मंगल सिंह गंधर्व ह मोहरी वादन करत रिहिस त संग म ही मंचीय प्रस्तुति के बेरा म जावय, काबर कि इंखर पिताजी ह आँख ले अंधा रिहिस ,पर मोहरी के तान  अतका सुग्घर छेड़य, जउन ल सुन के दर्शक मन ल थोरको विश्वास नई होवय कि ये मोहरी के बजईया कलाकार ह आँख ले अंधा हे अउ अइसन मईनखे भी अतका सुग्घर मोहरी के वादन कर सकत हे। पिता जी के संग म जावत - जावत वो संगीत के माहौल म रही के मोहरी वादन के गुन श्री राधे सिंह गंधर्व अऊ इंखर भाई राधेलाल गंधर्व म भी आवत गिस अऊ ननपन म ही मोहरी वादन म इंखर रुझान होगे, काबर कि दोनों भाई बाप के संगे-संग म जावय। फेर पुत्र मन के मोहरी के प्रति आकर्षण ल देख के इंखर पिताजी ह अपन पुत्र मन ल भी मोहरी बजाय के गुर सिखाईस।  

मोहरी वादन सीखे के बाद राधेसिंह गंधर्व जी ह छत्तीसगढ़ के ख्याति प्राप्त नाचा दल मटेवा के नाचा के मंच म जुड़ के 18 बछर तक मटेवा के नाचा पार्टी म मोहरी के वादन करिस, जउन नाचा पार्टी के ओ बखत गजब नाम रिहिस अऊ छत्तीसगढ़ के मूल नाचा के आत्मा वो बेरा म जियत रिहिस। फेर धीरे-धीरे आप नाचा के मंच ले आघु बढ़ेव अउ खुद के एक गांड़ा (गड़वा) बाजा के दल बनायेव अऊ  छत्तीसगढ़ के छोटे ले लेके बड़का मंच म आप आज भी प्रस्तुति देवत आवत हो। आपके मोहरी दल म ना केवल आप वादन करथव बल्कि आपके नवा पीढ़ी आपके पुत्र भी आपके साथ मंच म तबला के वादन करथे। श्री राधेसिंह गंधर्व जी ह अपन बेरा म दुसरी कक्षा ले आघु तो नई पढ़ पाइस काबर कि वो बखत आर्थिक तंगी रिहिस अउ वोखरे सेती पिताजी के संग म मोहरी वादन के प्रस्तुति बर आप ल संगे - संग जाना पड़े अऊ आप जादा नई पढ़ पायेव। फेर आप अपन पुत्र अऊ पुत्री दुनो झन ल इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ ले संगीत के विधिवत शिक्षा देवाय हो, ये आपके कलाकारी के प्रति समर्पण अऊ जुड़ाव ल बताथे। जहाँ तक आपके प्रस्तुति के बात करन त आप ल  छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच म अपन मोहरी वादन के प्रस्तुति करे के अवसर मिलत हे अऊ सरलग ये राज्योत्सव के मंच ले आप जुड़े हव। आप ल इंदिरा कला संगीत विश्विद्यालय खैरागढ़ के महोत्सव म भी मोहरी वादन करे के सौभाग्य प्राप्त होय हे अउ ये मंच म आपके प्रस्तुति ह बताथे कि आप कतका बड़िहा मोहरी के वादन करथव। प्रस्तुति के बात करन त आप 2013 म मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह म भी वादन करे हो । येखर अलावा आप 2015 म भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी के हमर छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रवास के बखत आप ल रइपुर म अपन मोहरी दल के संग हमर माननीय प्रधानमंत्री जी के स्वागत म मोहरी वादन करे के अवसर प्राप्त होय हे। येखर अलावा आप देश अउ प्रदेश के आने - आने बड़का मंच म अपन प्रस्तुति देय हो जेमा भिलाई इस्पात संयंत्र के भी मंच शामिल हे। आप छत्तीसगढ़ के लगभग सबे आकाशवाणी केंद्र म अपन मोहरी के वादन करे हो, संगे - संग आप दूरदर्शन रइपुर ले भी जुड़ेव। श्री राधेसिंह गंधर्व जी ह छत्तीसगढ़ के छालीवुड म भी अपन कदम रखिस अऊ छत्तीसगढ़ी फिल्म "मयारू भौजी" के गीत म भी अपन मोहरी के तान ले संगीत दिस अऊ ये फिल्म ह श्री गंधर्व जी ल बॉलीवुड म अपन समे के बड़का सितारा राज बब्बर के संग म भेंट कराईस जउन मूलतः रंगमंच के कलाकार आय । जब राधेसिंह गंधर्व जी ह मयारू भौजी के गीत के रिकार्डिंग बर बम्बई गये रिहिस त उहें ये बड़का सितारा संग म भेंट होय रिहिस अऊ फेर आप राज बब्बर जी के पत्नि के संग म रंगमंच ले जुड़ के आप बहुत दिन तक बम्बई म रहिके उंखर नाटक बर अपन मोहरी के संगीत देव, ये हमर छत्तीसगढ़ बर बड़का गरब करे के बात आवय अउ ये ह श्री गंधर्व जी के मोहरी वादन म कतका पकड़ हे वोला दर्शाथे। श्री गंधर्व जी ह जब टेप कैसेट के बेरा रिहिस तब कतको अकन ले छत्तीसगढ़ी ऑडियो वीडियो कैसेट म अपन मोहरी के वादन करिस। जउन वाद्ययंत्र के आप वादन करथव वो मोहरी ल आप अपन हांथ ले खुदे बनाथव अऊ हमर छत्तीसगढ़ के आने-आने क्षेत्र के कलाकार मन ल भी अपन हांथ के बनाय मोहरी ल देथव अउ दूर-दूर से आपके पास ये क्षेत्र ले जुड़े कलाकार मन मोहरी प्राप्त करे बर आथे।

आप ल अउ आपके मोहरी के दल ल ये कलाकारी के क्षेत्र म अग्रणी काम करे बर कतकोन बड़का सम्मान भी मिलिस काबर कि आप हमर गड़वा बाजा के जुन्ना विधा ल आज भी जीवंत रखे हो अऊ अतका बड़का - बड़का मंच म प्रस्तुति देय के बाद भी आप आज भी काखरो बर-बिहाव म भी अपन मोहरी दल संग गड़वा बाजा के वादन करथव, जउन हर आपके सरल जीवन ल दर्शाथे अऊ येखर सेती ही आप ल मोहरी वादन के क्षेत्र म बड़का सम्मान भी मिले हावय जउन म दाऊ महासिंग चंद्राकर सम्मान 2012 भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा, भुइयां सम्मान 2007 भिलाई, राष्ट्र का गौरव सम्मान 2012 धमतरी, धरती पुत्र सम्मान 2013 म जगत गुरु शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज द्वारा, प्रखर प्रतिभा सम्मान 2007 छत्तीसगढ़ शासन द्वारा, अऊ मोहरी वादन के क्षेत्र म आप ल उत्कृष्ट कार्य करे के सेती 15 अगस्त 2016 म कलेक्टर जिला प्रशासन बालोद, महिला एवं बाल विकास विभाग अउ समाज कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ शासन मंत्री श्रीमती रमशिला साहू द्वारा आप ल सम्मानित करे गिस।

मय शासन ले ये बात के उम्मीद करथव कि हमर छत्तीसगढ़ के अइसन कलाकार ल जउन हमर राज के कला संस्कृतिक ल जीवंत रखे बर सरलग बुता करत हे त अइसन कलाकार ल पद्मश्री जइसन बड़का सम्मान ले सम्मानित करे जाय , जउन ह हमर छत्तीसगढ़ के जनमानस बर गरब के दिन होही। अऊ हमर माटी ले जुड़े कलाकार ल उंखर कलाकारी के सही सम्मान हमन दे पाबो। 

        आलेख

    दुर्गेश सिन्हा "दुलरवा"

      छुरिया बंजारी

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