मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिस दिन सूर्यदेव की आराधना की जाती है और इस बहुत महत्व होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते है तथा उत्तरायन हो जाते हैं। जी हाँ और इन दोनों संक्रमण के कारण ही इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। आप सभी को बता दें कि हिंदू धर्म में यह दिन सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव के साथ ही अपने इष्ट देव की आराधना करना बहुत ही शुभ फलदायी माना जाता है। वहीं धार्मिक मान्यता को माने तो मकर संक्रांति के दिन पूजा-पाठ और दान करने का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है। आज हम आपको बताने जा रहे है राशिनुसार मंत्र जाप और दान सामग्री, पूजा विधि .
12 राशि के 12 सूर्य मंत्र-
– मेष- ॐ अचिंत्याय नम:
– वृषभ- ॐ अरुणाय नम:
– मिथुन- ॐ आदि-भुताय नम:
– कर्क- ॐ वसुप्रदाय नम:
– सिंह- ॐ भानवे नम:
– कन्या- ॐ शांताय नम:
– तुला- ॐ इन्द्राय नम:
– वृश्चिक- ॐ आदित्याय नम:
– धनु- ॐ शर्वाय नम:
– मकर- ॐ सहस्र किरणाय नम:
– कुंभ- ॐ ब्रह्मणे दिवाकर नम;
– मीन- ॐ जयिने नम:।
राशिनुसार दान सामग्री-
– मेष- तांबा की वस्तु, दही या तिल-गुड़ का दान शुभ रहेगा।।
– वृष- चांदी, तिल का दान शुभ रहेगा।।
– मिथुन- पीला वस्त्र, गुड़ गरीबों को दें।
– कर्क- सफेद ऊन, तिल का दान शुभ रहेगा।।
– सिंह- गुड़, गेहूं का दान शुभ रहेगा।।
– कन्या- हरा मूंग और तिल का दान शुभ रहेगा।।
– तुला- गुड़ और 7 प्रकार के अनाज का दान शुभ रहेगा।।
– वृश्चिक- लाल वस्त्र, दही का दान शुभ रहेगा।।
– धनु- पीले वस्त्र, गुड़ का दान शुभ रहेगा।
– मकर- कंबल, गुड़ का दान शुभ रहेगा।
– कुंभ- कंबल, घी का दान शुभ रहेगा।।
– मीन- चना दाल, तिल करना फलदायी शुभ रहेगा।
मकर संक्रांति 2022 शुभ मुहूर्त- मकर संक्रांति का क्षण या सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: दोपहर 02 बजकर 43 मिनट पर मकर संक्रांति का पुण्य काल: दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 45 मिनट तक मकर संक्रान्ति महा पुण्य काल: दोपहर 02 बजकर 43 मिनट से शाम 04 बजकर 28 मिनट तक।
पूजा समय- संक्रांति का पुण्य काल 6 घंटे पूर्व से लेकर 6 घंटे बाद तक मान्य होता है। आप 14 जनवरी को सूर्य देव की पूजा सुबह 08 बजकर 43 मिनट के बाद प्रारंभ कर सकते हैं।
मकर संक्रांति पूजा मंत्र- इस दिन आपको सूर्य देव के मंत्र ॐ सूर्याय नम:, ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः, ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर: का जाप करते हुए पूजा कर सकते हैं। जी हाँ और इन तीन मंत्रों में से जो आप आसानी से उच्चारण कर सकें, उसका उपयोग करें।
मकर संक्रांति पूजा विधि- सबसे पहले शुभ मुहूर्त में स्नान कर लें। स्नान के पानी में काला तिल, हल्का गुड़ और गंगाजल मिला लें। अब साफ वस्त्र धारण करें। एक तांबे के लोटे में पानी भर लें। इसके बाद उसमें काला तिल, गुड़, लाल चंदन, लाल पुष्प, अक्षत् आदि मिला लें। अब सूर्य देव को स्मरण करके उनके मंत्र का जाप करें। इसके बाद उनको वह जल अर्पित कर दें। अब आप उनसे अपने निरोगी जीवन और धन्य धान्य से पूर्ण घर देने की मनोकामना करें। ध्यान रहे इस दौरान सूर्य देव की पूजा के बाद शनि देव को काला तिल अर्पित करें। जी दरअसल आज के दिन सूर्य और शनि देव की काले तिल से पूजा करने पर दोनों ही प्रसन्न होते हैं।

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