मिट्टी के हुनर से आत्मनिर्भर बनीं सावित्री राणा, बिहान योजना से बदली जिंदगी...
त्वरित ख़बरें :- अमित यादव रिपोर्टिंग

रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर उपलब्ध करा रही है। रायगढ़ जिले की ग्राम पंचायत सियारपाली की सावित्री राणा इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं।

बिहान योजना से जुड़ने से पहले सावित्री राणा एक गृहणी थीं और उनके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं था। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत के साथ वित्तीय सहयोग और बैंक ऋण का लाभ लेकर अपने पारंपरिक कुम्हारी के हुनर को स्वरोजगार का माध्यम बनाया।

सावित्री राणा अब मिट्टी के दीये, मटके, गमले, गुल्लक सहित विभिन्न उपयोगी और सजावटी वस्तुएं तैयार करती हैं। मेहनत और लगन से उन्होंने पारंपरिक कुम्हारी कार्य को व्यवसाय का रूप दिया और आज उनकी मासिक आय लगभग 8 से 9 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

कृष्णा स्वयं सहायता समूह और जागृति ग्राम संगठन से जुड़ी सावित्री को बिहान योजना के माध्यम से वित्तीय सहयोग मिला। उन्होंने आरएफ से 4 हजार रुपये और सीआईएफ से 8 हजार रुपये की सहायता प्राप्त की। इसके बाद बैंक से ऋण लेकर अपने व्यवसाय का विस्तार किया। वर्तमान में वे अपने कारोबार से होने वाली आय से नियमित रूप से ऋण की अदायगी भी कर रही हैं।

सावित्री बताती हैं कि अब कुम्हारी का काम उनके लिए केवल पारंपरिक व्यवसाय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन गया है। त्योहारों के दौरान वे बड़ी संख्या में दीये तैयार करती हैं, जबकि अन्य दिनों में मटके, गमले, गुल्लक और घरेलू उपयोग की मिट्टी की वस्तुएं बनाकर बेचती हैं।

बिहान योजना से जुड़ने के बाद सावित्री के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली सावित्री आज अपने हुनर के बल पर परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

सावित्री राणा की सफलता यह साबित करती है कि सही अवसर, संगठन और वित्तीय सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने पारंपरिक हुनर को भी मजबूत आजीविका में बदल सकती हैं। मिट्टी से दीये गढ़ने वाली सावित्री ने अपने हुनर और मेहनत से न सिर्फ अपने जीवन में आत्मनिर्भरता का उजाला किया है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

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