दुर्ग जिले के भिलाई टाउनशिप एरिया में संचालित कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के खिलाफ श्रम विभाग में शिकायत की गई है। यहां कलेक्टोरेट दर पर काम करने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने श्रम विभाग में शिकायत की है कि उनसे शासन की तरफ मिलने वाली छुट्टियों की वेतन कटौती की जा रही है। इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए श्रम विभाग ने कल्याण महाविद्यालय प्रबंधन से जवाब मांगा है।
कल्याण महाविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी के लगभग 35-40 की संख्या में कर्मचारियों ने कॉलेज के पूर्व सहायक प्राध्यापक नितेश गुप्ता के साथ जाकर श्रम आयुक्त के समक्ष शिकायत की है। उन्होंने श्रम आयुक्त को बताया कि कल्याण कॉलेज शासन की तरफ से मिलने वाली होली, दिवाली, दशहरा और गांधी जयंती जैसे शासकीय अवकाशों की छुट्टियों पर सभी कर्मचारियों का वेतन काट रहा है। कर्मचारियों को पूरे महीने का वेतन न देकर 22 दिन, 23 या फिर 24 दिन का ही दिया जाता है। शेष दिन का वेतन यह कहते हुए काट दिया जाता है कि उस दिन शासकीय अवकाश था। कर्मचारियों का कहना है कि जब उस दिन कॉलेज ही बंद था तो वह काम भी कैसे करेंगे। साथ ही उनका कहना है कि कलेक्टोरेट दर की नियमावली में भी शासकीय अवकाश का पैसा काटने का जिक्र नहीं है।
डेलीवेजेज कर्मचारियों को दो तरह का किया जा रहा भुगतान
कर्मचारियों का आरोप है कि कॉलेज में 60-70 डेलीवेजेज कर्मचारी कार्य कर रहे हैं। इसमें कुछ कर्मचारियों का शासकीय अवकाश का वेतन कट रहा है और कुछ का नहीं कट रहा है। इस बारे में कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संतोष जैन का कहना है कि जिन कर्मचारियों ने कलेक्टोरेट दर पर भुगतान करने की शिकायत श्रम विभाग में की थी। उन कर्मचारियों को कॉलेज कलेक्टोरेट दर पर भुगतान कर रहा है और उन पर कलेक्टोरेट दर का नियम लागू होता है। शेष कर्मचारियों को पुराने दर पर ही भुगतान किया जा रहा है और उनका शासकीय अवकाश का पैसा नहीं काटा जा रहा है।
लिखित में आदेश मिलने पर नहीं की जाएगी कटौती
कल्याण पीजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संतोष जैन का कहना है कि कलेक्टोरेट दर पर भुगतान उसके नियम के मुताबिक किया जा रहा है। रही बात शासकीय अवकाश पर वेतन कटौती की तो वह कलेक्टोरेट दर के नियमानुसार की जा रही है। सप्ताह में एक दिन मिलने वाली छुट्टी का पैसा नहीं काटा जा रहा है। इसके अलावा शेष अवकाश का पैसा काटा जा राह है। श्रम विभाग में इसकी जानकारी दे दी गई है। मामले की सुनवाई चल रही है। वहां से यदि इस सबंध में कोई लिखित आदेश मिलता है तो उसी के मुताबिक कार्य किया जाएगा।

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