झोलाछाप डॉक्टर पर गंभीर आरोप, स्वास्थ्य विभाग ने जून में जांच के निर्देश दिए; अब तक क्या हुआ?
त्वरित ख़बरें :- सिटी रिपोर्टर दुर्ग

भिलाई। भिलाई के कोसा नगर क्षेत्र में बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता एवं पंजीयन के मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायत सामने आई है। शिकायत में दिनेश साहू पर मरीजों को उपचार देने, दवाइयां एवं इंजेक्शन इस्तेमाल करने तथा अपने नाम के साथ ‘डॉक्टर’ शब्द का उपयोग करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्ष के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

स्वास्थ्य विभाग ने जून में जांच के लिए भेजा था पत्र

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला दुर्ग के कार्यालय से 22 जून 2026 को पत्र क्रमांक NHA/2026/5379-5380 जारी किया गया था। पत्र के माध्यम से मामले की जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), भिलाई को कार्रवाई के लिए अवगत कराया गया था।

दस्तावेज में अवैध क्लीनिकों के संचालन से संबंधित शिकायतों की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा के लिए गठित समिति का उल्लेख है। समिति में एसडीएम की अध्यक्षता के साथ थाना प्रभारी और खंड चिकित्सा अधिकारी को जांच प्रक्रिया से जोड़े जाने की बात कही गई है।

शिकायत में लगाए गए कई गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता ने संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन की जांच की मांग की है। इसके अलावा कथित क्लीनिक एवं इलाज के स्थानों का निरीक्षण करने, दवाइयों और इंजेक्शन के उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच करने तथा मरीजों को दिए जाने वाले उपचार संबंधी रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की गई है।

शिकायत में पूर्व में कुछ मरीजों की तबीयत बिगड़ने और दो लोगों की मृत्यु की घटनाओं से भी संबंधित व्यक्ति का नाम जोड़े जाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। इसलिए इन दावों को जांच के निष्कर्ष से पहले तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

‘डॉक्टर’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल

शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा अपने नाम के साथ ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है और सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की वॉल राइटिंग भी कराई गई है।

यदि किसी व्यक्ति द्वारा चिकित्सकीय योग्यता या पंजीयन को लेकर भ्रामक दावा किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी वैधानिक स्थिति की जांच की जा सकती है। इसके लिए शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और अन्य संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।

तस्वीरों और कथित संपर्कों को लेकर भी शिकायत

शिकायत में कुछ तस्वीरों और कथित स्थानीय संपर्कों का भी उल्लेख किया गया है। एक व्यक्ति को लेकर यह आरोप लगाया गया है कि वह लोगों को इलाज के लिए संबंधित व्यक्ति के पास भेजता था और कथित रूप से कमीशन लेता था।

हालांकि, किसी व्यक्ति के साथ तस्वीर में दिखाई देना मात्र किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए बयान, दस्तावेज और अन्य वैधानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आवश्यक होगी।

इसी तरह शिकायत में कुछ राजनीतिक संपर्कों का भी उल्लेख किया गया है। किसी जनप्रतिनिधि से परिचय या राजनीतिक संबंध होना अपने आप में किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता साबित नहीं करता। यदि राजनीतिक संरक्षण या जांच प्रभावित करने जैसे आरोप हैं, तो उनके समर्थन में ठोस साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।

जांच के नतीजे का इंतजार

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जून 2026 में जांच के लिए पत्र जारी किए जाने के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि जांच समिति ने मामले में क्या कार्रवाई की और जांच किस स्तर तक पहुंची?

क्या संबंधित व्यक्ति की चिकित्सकीय योग्यता और पंजीयन का सत्यापन किया गया? क्या कथित क्लीनिक का निरीक्षण हुआ? क्या दवाइयों और इंजेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई? यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसका निष्कर्ष क्या है—इन सवालों के जवाब अब सामने आना बाकी हैं।

निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा सच

यह मामला सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। यदि जांच में बिना वैध योग्यता या पंजीयन के चिकित्सा किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोप जांच में निराधार पाए जाते हैं तो उसका निष्कर्ष भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।

आरोपित व्यक्ति का पक्ष भी निष्पक्ष जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि उनके पास वैध चिकित्सकीय डिग्री, पंजीयन या अन्य संबंधित दस्तावेज हैं, तो उन्हें जांच रिकॉर्ड में शामिल कर सत्यापन किया जाना चाहिए।

फिलहाल, जून में जारी स्वास्थ्य विभाग के जांच पत्र के बाद जांच की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई सार्वजनिक होने का इंतजार है। मामले में अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय किया जा सकता है।

YOUR REACTION?

Facebook Conversations