छत्तीसगढ़ में जब से 2022 -2023 का बजट पेश हुआ है तब से यहां के कर्मचारियों के चेहरे में मुस्कान आ गई है और यह मुस्कान आए क्यों नहीं क्योंकि लंबे समय से चली आ रही इस कर्मचारियों के मांग पर प्रदेश के भूपेश बघेल सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया है | दरअसल इस वर्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार ने अपनी चौथी बजट को कुछ नए अंदाज से पेश किया और वह अंदाज है गरीब किसानों द्वारा गौठानो में संग्रहित किए जाने वाले गोबर से निर्मित सूटकेस में भरकर बजट पेश किया गया लेकिन इस सूटकेस में गरीबों के लिए कुछ भी खास नहीं रहा गरीब किसान मजदूर के प्रतिक इस गोबर के सूट पर सूटकेस ने कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों को ही खुश करने तक ही सीमित रहा असल में जिस गरीब किसान मजदूर के चेहरे में मुस्कान आना चाहिए वह सरकार के बजट में नहीं दिखा सरकार स्वयं अपने विधायकों व कर्मचारियों से लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तक के मानदेय वह महंगाई भत्ता में बार-बार वृद्धि करती है वह चाहे केंद्र की सरकार हो या फिर राज्य की सरकार लेकिन मजदूर किसान के श्रम से असल जिंदगी चलती है उस परिवार के पेंशन प्राप्त पेंशन हितग्राहीयो की पेंशन राशि कब बढ़ेगी जबकि आज एकल परिवार के कारण अधिकांश वृद्ध माता-पिता बेसहारा होते जा रहे हैं और पेंशन योजनाओं से मिलने वाली मासीक पेंशन पर आश्रित है लेकिन इस गरीबों के लिए कोई महंगाई बढ़ी नहीं है| लंबे समय से चली आ रही है वहीं पेंशन की राशि 350 आज भी उन्हें दिया जाता है अब आप बताइए क्या गुजारा होगा इतनी कम राशि में गरीबों का क्या गुजारा ?
सरकार इन पेंशन प्राप्त लोगों का सूध इसलिए नहीं ले रही है क्योंकि इनका कोई बड़ी संघ या संगठन नहीं है जो इसकी आवाज को उठाएं और पहुंचा पाए सरकार के नुमाइंदों तक जिस तरह कर्मचारियों के द्वारा संघ संगठन बनाकर अपनी आवाज को सड़क से संसद तक पहुंचाया जाता है जबकि चुनाव के पूर्व वर्तमान में सत्ता में काबिज सरकार ने अपने घोषणा पत्र में इस गरीबों की पेंशन राशि में बढ़ोतरी का वादा किया था लेकिन आज विपक्ष भी मौन है क्योंकि वह भी मतलब की राजनीति कर रहे हैं उन्हें इस गरीब असहाय वृद्ध जनों से क्या वास्ता इन गरीबों के हाथों में पूर्व के सरकार में मोबाइल का वाट्स संचार माध्यम से जोड़ने का दम भर डाला लेकिन आज महंगाई के दौर में सरकार कंपनियों के मुनाफे के लिए इतना सोचती है कि कंपनी मन मुताबिक दाम बढ़ा रहे हैं एक माह का मोबाइल रिचार्ज उस गरीबों को मिलने वाली पेंशन राशि के बराबर है केंद्र सरकार द्वारा योजना के माध्यम से गैस कनेक्शन बांटे गए ताकि यह गरीब परिवार सहित वातावरण में खाना बना सकें अब सवाल यह है कि क्या अगर कोई पेंशन के सहारे से अपने जीवन चलाने वाले पेंशन हितग्राही उज्जवला योजना से प्राप्त गैस टंकी में अगर गैस भरवा ना चाहे तो कितने माह लगेंगे भरवाने के लिए , गरीब खाएगा क्या और बचाएगा क्या ? योजना केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित किया जा रहा है लेकिन गरीबों के पेंशन के लिए मौन साध रखी है क्या महंगाई केवल जनप्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए बढ़ रही है आम आदमी जो वृद्ध है या विधवा या फिर विकलांग है उनके लिए महंगाई नहीं बढ़ी है मैं इन गरीबों की हक के लिए केंद्र और राज्य के दोनों सरकार से अपील करता हूं कि उन गरीबों का भी सोच लिया जाए जो असल मायने में इस राज्य के निर्माण में अपने जीवन और जवानी श्रम करते हुए गुजार देता है तब जाकर एक सशक्त राज्य का निर्माण होता है
दुर्गेश सिन्हा / दुर्रे बंजारी( छुरिया )

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