राजनांदगांव २२ अप्रैल
पेंड्री स्थित भारत रत्न स्व अटल बिहारी बाजपेयी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में चिकित्सा व्यवस्था 10 मई के बाद पूरी तरह से लड़खड़ा जाएगी। यहां हर वार्डों में 24 घंटे सेवाएं देने वाले 125 इंटर्नशिप वाले जूनियर डॉक्टर (जूडो) वापस लौट जाएंगे। विडंबना है कि अभी इनकी जगह पर दूसरे इंटर्नशिप वाले डॉक्टरों को आने में समय लगेगा।
कोविड संक्रमण की वजह से एमबीबीएस की परीक्षा में देरी के चलते नए इंटर्नशिप वाले डॉक्टर नहीं निकल पाएं हैं। खबर है कि जून में परीक्षा के बाद जुलाई में इंटर्नशिप वाले डॉक्टर आएंगे। यानी की दो माह तक गिनती के सीनियर डॉक्टर ही वार्ड संभालेंगे। जबकि इंटर्नशिप वाले डॉक्टरों की वार्डों में 8-8 घंटे की ड्यूटी लगती है।
ये मरीजों के बीच रहकर चिकित्सा का अध्ययन करते हैं। इनके वार्डों में 24 घंटे तैनात रहने से मरीजों को भी राहत मिलती है। मरीजों के परिजन भी इन्ही इंटर्नशिप वाले जूनियर डॉक्टरों से सलाह और मदद लेते रहते हैं।
सीनियर के संपर्क में रहते हैं
जूनियर डॉक्टर ही वार्ड में सक्रिय रहते हुए सीनियर डॉक्टरों से समन्वय बनाकर मरीजों के इलाज में भूमिका अदा करते हैं पर शासन की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने की वजह से चिकित्सा महाविद्यालय में लगातार डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इसकी वजह से परेशानी लगातार बढ़ती ही जा रही है।
पहले से ही विभिन्न विभागों में सीनियर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते उचित इलाज नहीं हो पा रहा है। यही नहीं इस सबकी वजह से गंभीर मरीजों को रेफर करने की नौबत आ गई है। इसके कारण मरीज व उनके परिजन हलाकान हो रहे हैं। इस संबंध में बताया गया कि जूनियर डॉक्टर एक साल के लिए इंटर्नशिप पर रखे जाते हैं। इसके बाद दूसरे इंटर्नशिप वाले डॉक्टर आकर वार्ड संभालते हैं पर फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं हो पा रही है।
एक्सपर्ट डॉक्टरों की कमी
पेंड्री अस्पताल के विभिन्न विभागों में सीनियर डॉक्टरों की कमी है। प्राध्यापकों की कमी से चिकित्सा महाविद्यालय में वर्तमान में पदस्थ सीनियर डॉक्टरों को पढ़ाई कराने जाना पड़ता है। वहीं ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में वार्ड भी देखना पड़ता है। सीनियर डॉक्टरों की ट्रीचिंग में ड्यूटी लगते ही ओपीडी का काम प्रभावित हो जा रहा है। स्वशासी समिति की बैठक में अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों की कमी की समस्या को रखा था। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की जानकारी अस्पताल प्रबंधन ने दी थी।
गायनिक डिपार्टमेंट में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं
गायनिक डिपार्टमेंट में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। एचओडी की ओर से कई बार पत्राचार कर पर्याप्त स्टाफ देने की मांग की गई है। मेडिसिन सहित सर्जरी डिपार्टमेंट में भी सीनियर डॉक्टरों का अभाव है। स्थिति यह है कि क्रिटिकल कंडीशन वाले मरीजों को सीधे मेकाहारा भेज दिया जा रहा है। एमसीएच में इलाज की सभी सुविधाएं होनी चाहिए।
नए कॉलेज में भेज रहे
स्थिति यह है कि प्रदेश के अन्य जिलों में खुले नए मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में यहां के कुछ सीनियर डॉक्टरों का तबादला भी किया जा रहा है। इस चक्कर में राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में अस्तित्व में आने के बाद अब फिर से संकट से घिरता जा रहा है, इसे सर्वसुविधायुक्त बनाया जाए, अधीक्षक डॉ. प्रदीप बेक ने बताया कि इंटर्नशिप वाले डॉक्टरों की सेवा अवधि समाप्त हो रही है। इनका जाना तय है पर वैकल्पिक व्यवस्था जुलाई के बाद ही हो पाएगी।

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