दुर्ग- राजनांदगांव / (त्वरित ख़बरें प्रतिनिधि)। निगम क्षेत्र में गोठान और कांजीघर होने के बाद भी सड़कों में मवेशियों का जमावड़ा है। दुर्ग राजनांदगाव के बाइपास सड़क में वाहनों की भरमार है। ऐसे में प्रतिदिन यातायात प्रभावित हो रही है। शहर में रोका-छेका अभियान को प्रभावी ढंग से संचालितनहीं किए जाने से आम लोगों को सड़कों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है साथ ही आवागमन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है ।
मवेशियों को सुरिक्षत जगह रखने और यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए शहर में भी गोठान का निर्माण किया है लेकिन निर्माण के बाद मवेशियों को हांककर वहां तक ले जाने के लिए अमला नियुक्त नहीं की गई है। शहर के प्रत्येक चौक चौराहों में मवेशियों को झुंड में खड़े अथवा बैठे देखा जा सकता है। या फिर रोड़ पर अचानक सड़क पार करते नजर आते है| लाकडाउन के दौरान सड़के सुनी होने से यहां वहां भटक रहे मवेशियों को रोका छेका अभियान के तहत गोठानो में ले जाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। लोगों का आवागमन रहता है ऐसे में मवेशियों का सड़कों में होना यातायात के लिए खतरे का सबब बना है। ग्रामीण क्षेत्रों मे चारागन भूमि अतिक्रमण के कारण लगातार सिमट रहा है। ऐसे में गाय बैल के लिए चारा की कमी है। शासन की ओर से नरवा गरूवा घुरूवा बारी योजना के तहत गायों के संरक्षण के लिए गोठान की योजना तो शुरू की गई है लेकिन अभी तक कई गांव में इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। निगम प्रशासन की ओर से एक जुलाई से रोका छेका संकल्प अभियान को सघनता से संचालित करने की कवायद की गई। देखना यह है किअभियान कितना कारगर होता है।
साप्ताहिक बाजारों में डेरा
ज्यादातर शहर के हटरी बाजारों में पशुओं देखा जा सकता है। इसके अलावा जगह जगह झुंड में बैठे हुए मवेशियों को देखा जा सकता है। शहर के कांजीहाउस की दशा इतनी बदहाल हो चुकी है कि यह अब बेसहारा पशुओं को रखने के काबिल नहीं रह गई है। यहीं वजह है कि शहर में बेखौफ घूमते आवारा पशुओं को आसानी से देखा जा सकता है।
मवेशी पालको की मनमानी
शहर के मवेशी के पालक इन्हें सड़कों पर ही छोड़ देते हैं। इन दुधारू पशुओं में सीमित मात्रा में बकरिया व अधिक मात्रा में गाय शामिल हैं। जब गाय बछड़ा देती है,उस समय मवेशी पालक उसकी सुध लेते हैं। शहर के सड़क किनारे खाली जमीनत बेला बनाकर मवेशी पालन किया जा रहा है। इस तरह का नजारा कई जगहों में देखा जा सकता है।
शासन प्रशासन को सुध नही
राज्य के सत्ते में बैठी कांग्रेस शासन जिनके द्वारा गोठान योजना राज्य के प्रत्येक गांवो में,शहरों में लागू किया जहाँ गोठानो में एक भी मवेशी आपको नजर नही आयेंगे शहर के सड़को में बेबाक घूमते हुए मवेशी नजर जरुर मिलेंगे शासन गोठान योजना को लागू कर तो दिए है, परन्तु एक नजर इस ओर भी दे सकते है कि सड़को में घूमते हुए मवेशी उनकी जान को खतरा तो है ही साथ ही सड़को में चलने वाले वाहन एवं वाहन चलाने वाले चालक की जान एवं साथ मेंयात्रा करने वाले अन्य व्यक्तियों की भी जिन्दगी खतरे में रहती है | सरकार को चाहिए की इस तरफ भी अपना ध्यान केन्द्रित करें |
हो रही मौते
रोड़ पर घूमते हुए गायो की वजह से न जाने अब तक कितने लोगो ने अपनी जान तक गँवा चुके है ऐसे में जो पशु पालक है जिन्होंने अपने पशुओ को खुले में छोड़ रखा है जिसकी वजह से दुर्घटनाये होती है ऐसे में पशु पालकों को कम से कम 6 महीने सजा का प्रावधान होना चाहिए | आये दिन ख़बरें मिलती है सड़क दुर्घटना में अज्ञात व्यक्ति की जान गई या फिर ट्रक ने किसी मोटर सायकल वाले को कुचला या फिर रास्ते पर जा रही कार दुर्घटना ग्रस्त हुई ऐसी ख़बरें आये दिन पढ़ने को मिलती है इसमें से कई ऐसे मौते है जो सड़क पर मवेशियों को बचाते हुई होती है | पशु पालक जो अपने पशुओ को सिर्फ दूध निकलने तक ही बांध के रखते है फिर बाद में खुला छोड़ देते अगर इन्ही गायों को सड़क में जा रही गाड़ी से चोट लग जाए या किसी को नुकसान पहुच जाए तो वही पशु पालक अपना मुवावजा मांगने पहुच जाते है उन्हें अपनी गलती का एहसास नही होता की मवेशियों को खुला छोड़ के गलती तो पहले खुद ने की, तो अगर दुर्घटना होती है इसमें मुवावजा तो पशु पालकों को ही देनी चाहिए | और सरकार को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए |

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