धान खरीदी का आज अंतिम दिन
त्वरित ख़बरें - 49 केंद्रों में खरीदी पूरी, 182 किसानों को टोकन बंटा

धान खरीदी का सोमवार 7 फरवरी अंतिम दिन है। 45 उपार्जन केंद्रों से 182 किसानों को टोकन जारी किए गए हैं। इसमें 5104 क्विंटल धान खरीदी होगी। जिले में 94 धान खरीदी केंद्रों से धान खरीदी हो रही है जिसमें 5 फरवरी को ही 49 उपार्जन केंद्रों में खरीदी पूरी कर ली गई है।

सरकार ने पिछले साल से ज्यादा किसानों की धान खरीदी की है। पिछले साल 6 फरवरी तक 407252 मीट्रिक टन धान खरीदी गई थी। इस बार 416487 मीट्रिक टन धान खरीदी की गई। इस हिसाब से 9235 मीट्रिक टन धान ज्यादा खरीदी कर ली गई है। इस बार शासन ने धान खरीदी के लिए अतिरिक्त समय दिया है। इसके चलते फरवरी के पहले हफ्ते तक धान की खरीदी जारी है। बारिश की वजह से भी जिले में तीन बार खरीदी प्रभावित रही। इसके चलते ही राज्य शासन ने धान खरीदी के लिए तारीख में बढ़ोत्तरी की गई। ताकि किसान धान बेच सकें।

13 केंद्रों ऐसे हैं जहां सिर्फ एक-एक किसान बाकी
दुर्ग जिले में इस बार 102652 किसानों ने धान बेचने रजिस्ट्रेशन करवाया है। 95591 किसान धान बेच चुके हैं। 13 केंद्रों में एक-एक किसान हैं। इनमें अहिवारा, औंधी, करंजा भिलाई, केसरा, कोड़िया, गाड़ाडीह, घोटवानी, झीट, बठेना, बोरी, मोहरेंगा, सेलूद व सिरसा शामिल हैं।

सबसे ज्यादा टोकन फुंडा के किसानों को बांटा गया
जिले में आखिरी दिन धान बेचने के लिए सबसे ज्यादा टोकन फुंडा खरीदी केंद्र में जारी किया गया है। यहां 23 टोकन जारी हुआ है। यहां 578.80 क्विंटल धान किसानों से खरीदी करना बाकी है। अंडा में 11 टोकन से 312.80 क्विंटल धान खरीदी होना है। निपानी जामगांव में 10 टोकन जारी किए गए हैं।

55 उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट से ज्यादा धान खरीदी
प्रदेश सरकार ने धान खरीदी की तारीख बढ़ाकर किसानों को एक सप्ताह का मौका दिया है। पहले खरीदी की आखिरी तिथि 31 जनवरी तय की गई थी लेकिन बेमौसम बारिश की वजह से खरीदी प्रभावित रही। जिसे बढ़ाकर 7 फरवरी किया गया। इस अंतिम तिथि में उन्हीं किसानों का धान खरीदी होगी जिन्हें टोकन जारी किया गया है। इधर 55 उपार्जन केंद्र ऐसे हैं जहां बफर लिमिट से ज्यादा धान का स्टॉक है।

59 प्रतिशत ही धान का उठाव, शेष का अब भी नहीं
धान खरीदी में इस बार भी उठाव को लेकर दिक्कतें हैं। जिले के उपार्जन केंद्रों में 1671019 मिट्रिक टन धान शेष है। 2493852 मिट्रिक टन धान का उठाव हो पाया है जो कुल खरीदी का 59.88 प्रतिशत है। धान उठाव में देरी होने से मिलिंग में देरी होगी और सेंट्रल पूल को चावल भेजने में लेटलतीफी हो सकती है। मौसम फिर से खराब हुआ तो उपार्जन केंद्रों में रखा धान खराब हो सकता है। बावजूद उठाव नहीं हुआ है।

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