वैश्विक महामारी कोरोना से बड़ी जनहानि हुई और देश की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई। उसी तरह ब्लैक थ्रिप्स ने किसानों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। छत्तीसगढ़ के किसान मिर्च की फसल पर ब्लैक थ्रिप्स कीट के अटैक से परेशान हैं। कीट के प्रकोप से मिर्च की फसल पूरी तरह तबाह हो गई है। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना के बाद छत्तीसगढ़ में भी ब्लैक थ्रिप्स की दस्तक ने किसानों की कमर तोड़ दी।
खेतों में लगी मिर्च की फसल को बचाने किसान लाखों रुपये की दवाइयों का छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन कोई भी दवा ब्लैक थ्रिप्स से बचाव में कारगर साबित नहीं हो रही है। फसल चौपट होने के कारण मिर्च उत्पादक किसान पौधों को उखाड़कर फेंकने को मजबूर हो गए हैं। दुर्ग जिले के मलपुरी कला के कृषक विजय चौहान ने बताया कि उन्होंने शिमला व तीखी मिर्च की फसल लगाई थी, लेकिन ब्लैक थ्रिप्स के प्रकोप से फसल तबाह हो गई। कई बार मिर्च की फसल में दवाइयों का स्प्रे कर चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। एक बार फसल उखाड़कर दूसरी बार फिर लगाया हूं। विजय चौहान ने बताया कि छत्तीसगढ सहित पूरे भारत में मिर्च की फसलों में महामारी की तरह फैली ब्लैक थ्रिप्स से फसल को किसान नहीं बचा पाए हैं। उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इस बार मिर्च की कीमत में भी काफी वृद्धि है।
कई बार दवा डालने के बाद भी नहीं हुआ लाभ
दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक क्षेत्र के कृषक तेजराम साहू ने बताया कि उन्होंने 10 एकड़ में मिर्च की फसल लगाई थी। ब्लैक थ्रिप्स के प्रकोप के बाद फसल को बचाने अब तक 3-4 लाख की दवाइयों का छिड़काव कर चुके हैं, लेकिन दवा कारगर नहीं होने की वजह से उन्होंने मिर्च के पौधों को उखड़वा दिया। अकोला के किसान भूपेंद्र दुबे ने बताया कि ब्लैक थ्रिप्स से मिर्च की फसल को भारी नुकसान हुआ है। मिर्च के एक फुल में 100 से भी ज्यादा कीट हैं। फल और पत्तों को कीट चूस लेते हैं, जिससे पूरा पौधा सूख जा रहा है। किसान अजय मढ़रिया ने बताया कि ब्लैक थ्रिप्स से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। किसानों को कोई उत्पादन लिए बिना ही फसल को उखाड़ना पड़ा। मिर्च की फसल लेने वाले किसान कर्ज में डूब गए हैं।
27 सालों की खेती में पहली बार ऐसा नुकसान
कृषि सलाहकार दिनेश जेठवा बताते हैं कि मिर्च के पौधे में अक्टूबर माह में पहली बार ब्लैक थ्रिप्स का प्रकोप देखा था। कीटों का जीवन फूलों पर निर्धारित रहता है। पहली बार गुलाब की खेती में यह देखा गया था। उनका कहना है कि दिन व रात का तापमान ज्यादा होने पर यह तेजी से पनपता है। मिर्च की खेती करने वाले किसानों को बड़ा नुकसान हुआ है। अब तक इसकी कोई कारगर दवा समझ में नहीं आई है। 27 सालों में पहली बार इस तरह के कीट का प्रकोप देख रहे हैं, जिस पर किसी भी दवा का असर नहीं हो रहा है।
मिर्ची की फसल पर पूरे वर्ष कीट का आक्रमण
कृषि विज्ञान केंद्र पाहंदा के वैज्ञानिक विजय जैन ने बताया कि इस कीट के डीम्ब व वयस्क दोनों ही नई पत्तियों की सतह को खुरचकर खाते हैं। इस कीट का तेजी से प्रकोप होने पत्तियां पूरी तह विकृत हो जाती है और पौधा समय पूर्व पतझड़ का शिकार हो जाता है। इस कीट का आक्रमण मिर्ची वाले फसलों में पूरे वर्ष रहता है, लेकिन सूखे के महीनों और नाइट्रोजन उर्वरक के अधिक उपयोग वाली खेतों में इसका आक्रमण ज्यादा होता है।
यह सावधानी बरतें किसान
- जहां तक संभव हो पायरेथ्रोइड्स समूह के दवाओं का उपयोग थ्रीप्स कीट के नियंत्रण के लिए न करें।
- दवाइयों का छिड़काव बदलकर करें। किसी एक प्रकार की दवा का बार-बार छिड़काव न करें।
- एक से अधिक प्रकार के कीटनाशक, फफूंदनाशक, वृद्धिकारक दवाइयों को आपस में मिलाकर छिड़काव न करें।
- आवश्यकता से अधिक नाइट्रोजन युक्त खाद का उपयोग न करें।
- लाभकारी कीटों की आबादी को संरक्षित रखने कीटनाशकों का आवश्यकता से अधिक उपयोग न करें।

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