दुर्ग/ 2 अगस्त 2022।
नगर पालिक निगम दुर्ग क्षेत्र अंतर्गत कचरा के बेहतर निष्पादन के लिए एसएलआरएम सेंटर संचालित जिसका निगम आज अलसुबह आयुक्त प्रकाश सर्वे ने स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली,सफाई दरोगा सुरेश भारती सहित अमला के साथ निरीक्षण किया। खुले हुए कंपोस्ट पिट को सेट निर्माण करने के लिए संबंधित इंजीनियर को दिए और बेहतर व्यवस्था निरंतर बनाए रखने अच्छे क्वालिटी का वर्मी कंपोस्ट बन सके।उन्होंने पुलगांव नाका स्थित एसएलआरएम सेंटर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के आने वाले कचरे के पृथकीकरण की प्रक्रिया और कंपोस्ट खाद को देखे और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। एसएलआरएम सेंटर में कचरो के निष्पादन को बेहतर तरीके से करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कपोस्ट खाद की जानकारी ली।निरीक्षण के दौरान निगम आयुक्त ने एसएलआरएम सेंटर में कचरों का पृथकीकरण एवं मशीन में काम करने वाले सभी स्वच्छता दीदियों,सफाई मित्र कर्मचारियों को सुरक्षा कवच एप्रॉन, दस्ताना, एवं मास्क जैसे सुरक्षा संबंधी कीट का उपयोग में लाने कार्य करने के निर्देश दिए। झिल्ली, पन्नी, प्लास्टिक आदि के कचरे को नियंत्रित करने एसएलआरएम सेंटर में निरंतर कार्य किया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि आयुक्त प्रकाश सर्वे ने कहा स्वच्छ एवं सुंदर दुर्ग की परिकल्पना के तहत विभाग को निर्देश दिए है। दुर्ग निगम क्षेत्र से प्रतिदिन डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के माध्यम से बहुतायत मात्रा में झिल्ली, पन्नी का कचरा निकलता है। इन कचरे को निगम के पुलगांव नाला स्थित,सहित क्षेत्र के अन्य एसएलआरएम सेंटर में एकत्रित कर कचरों का पृथकीकरण के बाद सूखे कचरे से प्राप्त पॉलीथीन को मशीन से बंडल बनाकर निष्पादन हेतु भेजा जा रहा है। इसी तरह गीले कचरो का पृथकीकरण के बाद एसएलआरएम सेंटर में कंपोस्ट खाद बनाया जा रहा है। इसे खाद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। इस कार्य में तेजी आने के बाद अब निगम क्षेत्र में पॉलीथीन के कचरों का ढेर भी अब नजर नहीं आ रहा है।निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने कचरे के पृथकीकरण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि निगम प्रशासन द्वारा संचालित एसएलआरएम सेंटर संपूर्ण निगम क्षेत्र से भारी मात्रा में निकल कचरे को वहां एकत्रित करने के बाद सभी
संपूर्ण निगम क्षेत्र से भारी मात्रा में निकलने वाले कचरे को वहां एकत्रित करने के बाद सभी तरह के गीले एवं सूखे कचरे को अलग अलग पृथक किया जाता है।गीले कचरों को पृथक करने के बाद जैविक खाद बनाया जाता है, इसी प्रकार लोहा, टीना, प्लास्टिक, कांच, लकड़ी, व कपड़े के सूखे कचरे का पृथक किए जाने के बाद रिसायकल की प्रक्रिया के लिए भेजा जा रहा है।

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