23 सितबंर 2022
कांग्रेस की सरकार को सत्ता में बैठे चार वर्ष पूरे होने जा रहे हैं और अगले वर्ष चुनाव है ऐसे में कुछ घोषणाएं किसानों की मांगों को देखते हुए होगी। भारतीय किसान संघ लगातार सरकार से मांग करता आया है की धान खरीदी किसानों की सहुलियत को देखते हुए नवंबर से की जाए जो अब जाकर चुनाव के एक वर्ष पूर्व सरकार ने मानी है। कांग्रेस के घोषणा पत्र में एक मुद्दा था जिसने किसानों को चुनाव के वक्त बहुत प्रभावित किया था भाजपा के समय का दो वर्ष का बोनस जो इन्होने देने की बात कही थी वह किसानों की अभी तक नहीं दिया गया है।
धान खरीदी नवंबर से हो मुख्यमंत्री की इस घोषणा से किसानों में राहत है। इसके साथ ही सरकार टोकनों की संख्या भी बढ़ाए कम से कम पांच टोकन देने का प्रविधान किया जाए। मक्का किसानों की मक्का खरीदी धान के साथ ही प्रारंभ की जाए। मक्का किसानों को पैसों की आवश्यकता के लिए कम दामों में मक्का, व्यापारियों को बेचने विवश होना पड़ता है। सरकार का अरहर, मूंग, उड़द की फसल समर्थन मूल्य में लेना स्वागत योग्य कदम है निश्चित ही सरकार के इस निर्णय से किसानों की आय में वृद्धि होगी। भारतीय किसान संघ इस विषय पर मुख्यमंत्री का अभिनंदन करता है एवं रबी में बोई जाने वाली फसलों को लेने की मांग करता है।
सिंचाई परियोजनाएं बहुत ही धीमी है इसे और तेज करने की आवश्यकता है। कुम्हारी जलाशय, बलौदा बाजार, सुतियापाट जलाशय कबीरधाम एवं ऐसी अन्य छोटी बड़ी योजनाएं लंबित पड़ी है जिनके पूर्ण होने से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी इनकी रुकावटों को दूर करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री स्वयं लोकतंत्र की बात करते हैं परंतु भारतीय किसान संघ को आज तक मिलने का समय नहीं दे पाए। क्या लोकतंत्र में सरकार को मुद्दों पर घेरने वाले संगठनों से एक मुख्यमंत्री दूरी बनाना कहां तक जायज है।