केसीजी में सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर का भंडार,एमएमसी में कच्चे लोहे की दो खदानें, उच्च क्वालिटी का तेंदूपत्ता

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12/सितंबर/2022

राजनांदगांव. मोहला-मानपुर- अंबागढ़ चौकी जिले के पहाड़, जंगल में वनोपज के साथ ही खनिज का भी भंडार है।खनिज के साथ वन संपदा का खजाना है नवगठित दोनों जिले में, यहां से होती रही है करोड़ों के राजस्व की आवक

नवगठित मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला खनिज और वन संपदा के मामले में बेहद समृद्ध हैं। यहां बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान, इंडस्ट्री, बड़े बाजार नहीं हैं पर इन दोनों जिलों के विकास में यहां मौजूद खनिज और वन संपदा अहम भूमिका निभाएंगे। एमएमसी जिले में कच्चा लोहा (आयरन ओर) की दो बड़ी खदानें हैं। इससे ही शासन को सालभर में 14 से 15 करोड़ रुपए का राजस्व मिल जाता है। इस क्षेत्र में उच्च क्वालिटी का तेंदूपत्ता निकलता है।

इसी तरह केसीजी जिला लघु वनोपज के मामले में काफी समृद्ध है। खनिज मामले में यहां सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन पाया गया जाता है। इसकी नीलामी होगी तो करोड़ों का राजस्व मिलना तय है। दोनों ही जिले में बांस, सागौन और अन्य इमारती लकड़ी निकलती है। दोनों ही जिलों में वन विभाग की ओर से हर साल वनांचल के रहवासियों के माध्यम से करोड़ों के वनोपज की खरीदी की जाती है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में पल्लेमाड़ी क्षेत्र में संचालित दो आयरन ओर के प्लांट इस क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाते आ रहे हैं। इस प्लांट में ही आसपास के ग्रामीणों को रोजगार भी मिला है। इस खदान की वजह से पल्लेमाड़ी, बोरिया सहित खड़गांव क्षेत्र में बाहर के लोगों ही आवाजाही होने से ये क्षेत्र व्यवसायिक रूप से भी समृद्ध होने लगे हैं। वन संपदा के रूप में सागौन का बड़ा जंगल है। इसके लिए संरक्षण के लिए बाकायदा पानाबरस प्रोजेक्ट भी बनाया गया है। पानाबरस के आसपास सागौन के साथ ही बांस में भी जंगल हैं। यहां पर अलग-अलग क्वालिटी के बांस पाए जाते हैं, जिसकी हर साल बड़े पैमाने पर नीलामी होती है।

अभी पूरा सेटअप बैठेगा
नए जिले में कलेक्टर, एसपी दफ्तर खुल चुके हैं। विभागों के संचालन के लिए पूरा सेटअप बैठेगा। इससे दोनों जिले के मुख्यालय व्यवसायिक केन्द्र के रूप में उभरेंगे। इन क्षेत्रों में जमीन की खरीदी-बिक्री में तेजी आई। कलेक्टर जगदीश सोनकर ने बताया कि राजस्व का बंटवारा नहीं होता। यह राज्य सरकार का होता है।

नीलामी से होगी बड़ी आवक, राजस्व बढ़ेगा

खनिज विभाग के अफसरों ने बताया कि नवगठित खैरागढ़- छुईखदान- गंडई जिले में मिश्रित खनिज पाए जाते हैं। साल्हेवारा क्षेत्र में आयरन ओर कच्चे लोहा मौजूद है पर इसकी नीलामी नहीं हुई है। बताया कि खैरागढ़ से छुईखदान के बीच भरपूर मात्रा में सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन (चूना पत्थर) पाया जाता है। अभी इसे चिन्हांकित किया गया है। राज्य सरकार की ओर से इसकी नीलामी कराई जाएगी तो इस जिले को बड़ा राजस्व मिल सकता है। खनिज अधिकारी राजेश माल्वे ने बताया कि बताया कि सीमेंट ग्रेड चूना पत्थर की खदानों को सीमेंट कंपनियों को ब्लॉक बनाकर नीलाम करते हैं। शासन स्तर पर यह प्रक्रिया पेंडिंग है।

महुआ का भरपूर उत्पादन
वन विभाग के अफसरों ने बताया कि तेंदूपत्ता के क्वालिटी के मामले में मानपुर क्षेत्र को व्यापारी ज्यादा पसंद करते हैं। बाहर से आने वाले व्यापारी इस क्षेत्र के तेंदूपत्ता की डिमांड ज्यादा करते हैं। इस क्षेत्र में महुआ का संग्रहण भी अच्छा होता है। अब तो इस क्षेत्र में संग्रहित महुआ प्रोसेसिंग यूनिट तक जाने लगा है। रेंजर जागेश गोंड ने बताया कि मोहला-मानपुर क्षेत्र के जंगल में औषधि गुणों वाले पेड़, पौधे भी पाए जाते हैं।

...11 करोड़ रुपए मिले थे

वन विभाग के अफसरों ने बताया कि खैरागढ़ जिला बांस उत्पादन के मामले में भी नंबर वन स्थिति में है। बीते वर्ष करोड़ों रुपए के बांस की नीलामी हुई थी। खैरागढ़ वन मंडल प्रदेश के बांस वनक्षेत्र की दृष्टि से बड़े वन मंडलों में से एक है। वर्ष 2020-21 में वन मंडल के 17 बांस कूपों के 4585.245 हेक्टेयर क्षेत्र में संवेदनशील परिस्थितियों में अमले ने योजनाबद्ध ढंग से बांस विदोहन और परिवहन किया। इस पूरी प्रक्रिया में वन विभाग को 11 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था।