जैसलमेर १३ अप्रैल पाकिस्तान के अत्याचारों से तंग आकर भारत बसे पाक विस्थापितों को केंद्र की सरकार ने भारतीय नागरीकता देने के लिए जैसलमेर जिले में कैंप का आयोजन किया है। इस कैंप में करीब 180 पाक नागरिकों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है। लेकिन अब नागरिकता में एक पेच के फंस जाने से केवल 3 लोग ही नियमो के तहत भारत की नागरिकता ले सकेंगे बाकियों को वापस कागजात के लिए प्रयास करने होंगे। दरअसल जिनके पासपोर्ट की अवधि खत्म हो गई है उन्हे वापस पाकिस्तान दूतावास जाकर उसकी अवधि को बढ़ाना होगा और फिर उसके बाद उसको जमा करवाना होगा तभी वो भारत की नागरिकता का पात्र होगा। इस नियम से सबसे ज्यादा लोग परेशान हो रहे हैं और उनका कहना है कि इस शिविर से उनको कोई फायदा नहीं हो रहा।
पाकिस्तानी दूतावास के लगाने होंगे चक्कर
दरअसल भारत कि नागरिकता के लिए सबसे पहले इन्हे अपना पाकिस्तान का पासपोर्ट पाकिस्तानी दूतावास में जाकर रेनेवल करवाना होगा और उसके बाद जमा करवाना होगा। नाथुराम ने बताया कि ये गरीब लोग हैं इतना पैसा नहीं है कि परिवार को लेकर दिल्ली जाए और वहां पासपोर्ट की पहले अवधि बढ़ाए और फिर जमा करवाए। इस प्रक्रिया में इनके एक आदमी का 5 हजार से भी ज्यादा रुपया खर्च होता है, साथ ही भाड़ा-खर्चा और पाकिस्तानियों को सुविधा शुल्क वो अलग। इस तरह ये गरीब लोग जो मजदूरी करते हैं वे इतना पैसा अपने व अपने परिवार के लिए कहां से लाएंगे। 180 आवेदनकर्ताओं में से ज्यादातर ऐसे ही लोग है। अब इनको नागरिकता मिलना मुश्किल लग रहा है।
इस संबंध में राज्य के गृह विभाग के वरिष्ठ शासन उप सचिव भवानी शंकर ने बताया कि आज विशेष नागरिकता शिविर में आई समस्या को केन्द्र सरकार गृह मंत्रालय भेज कर मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा। ओर जिला कलेक्ट्रेट शाखा सहित आईं बी की गोपनीय रिपोर्ट की क्लियरेंस ओर अन्य कमी पेशी के अभाव में कई प्रकरणों में पाक विस्थापितों को नागरिकता से वंचित होना पड़ेगा। वर्तमान में 180 पाक विस्थापितों की नागरिकता के आवेदन-पत्र जिला कलेक्टर कार्यालय में लम्बित है और सिर्फ तीन लोगों को भारतीय नागरिकता के प्रमाण पत्र देने के लिए पात्रता पूरी हैं। जानकारों के मुताबिक राज्य में लगभग 25 हजार पाक विस्थापित निवास कर रहे हैं और भविष्य में इनमें से पात्र नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी जानी है।