रायपुर। छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास और जादू-टोना के नाम पर होने वाली हिंसा चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में 83 लोगों की हत्या अंधविश्वास से जुड़े मामलों में हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जादू-टोना से जुड़ी हत्याओं के मामलों में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी जादू-टोना, तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक जैसी मान्यताओं का प्रभाव देखने को मिलता है। कई मामलों में बीमारी, पारिवारिक विवाद, फसल खराब होने या अन्य समस्याओं के लिए किसी व्यक्ति पर जादू-टोना करने का आरोप लगाकर उसकी हत्या कर दी जाती है।
इसके अलावा, रातों-रात अमीर बनने, गड़ा धन मिलने या तांत्रिक क्रियाओं से मनोकामना पूरी होने के लालच में भी कई लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस जांच में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें अंधविश्वास के कारण लोगों को प्रताड़ित किया गया या उनकी हत्या कर दी गई।
सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल कानून से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। लोगों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने, शिक्षा का प्रसार करने और अंधविश्वास के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। वहीं, पुलिस और प्रशासन भी समय-समय पर लोगों से अफवाहों और अंधविश्वास से दूर रहने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंधविश्वास के खिलाफ प्रभावी जनजागरूकता अभियान, शिक्षा और कानून का सख्ती से पालन ही ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने का सबसे प्रभावी उपाय हो सकता है।